हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में एक बार फिर बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई है। मंगलवार तड़के लग घाटी के कनौण गांव में बादल फटने से बूबू नाले में अचानक बाढ़ आ गई, जिसके कारण तीन दुकानें, एक पैदल पुल, और एक बाइक बह गए। इसके अलावा, सरवरी खड्ड में जलस्तर बढ़ने से एक और पैदल पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे कुल्लू शहर के पास मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा भी बह गया। इस प्राकृतिक आपदा में अभी तक किसी जानी नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन संपत्ति और फसलों को भारी नुकसान हुआ है।
मंगलवार तड़के करीब 2:30 बजे कुल्लू जिले की लग घाटी में बादल फटने की घटना हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, बादल फटने की तेज आवाज सुनकर लोग घबरा गए और अपने घरों से बाहर निकल आए। कनौण गांव में बूबू नाले में अचानक आए उफान ने तीन दुकानों को पूरी तरह बहा दिया, और गाँव का संपर्क अन्य क्षेत्रों से कट गया। सड़कों पर बड़े-बड़े पत्थर और मलबा जमा हो गया, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
इसके साथ ही, कुल्लू शहर के नजदीक सरवरी खड्ड में जलस्तर बढ़ने से एक पैदल पुल क्षतिग्रस्त हो गया। फोरलेन से कुल्लू बस स्टैंड को जोड़ने वाली मुख्य सड़क का एक हिस्सा भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गया। पुलिस ने क्षतिग्रस्त सड़क के हिस्से की बैरिकेडिंग कर दी है और लोगों को खतरा मोलकर वहां से गुजरने से मना किया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कुल्लू जिला प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए। जिला प्रशासन ने मंगलवार को जिले के सभी शिक्षण संस्थानों, स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने के आदेश जारी किए। डीसी कुल्लू, तोरुल एस. रवीश (IAS), ने बताया कि बादल फटने, फ्लैश फ्लड, और भूस्खलन के कारण सड़कें और पुल बह गए हैं, जिससे कई क्षेत्रों में संपर्क बाधित हुआ है। प्रशासन ने सरवरी खड्ड और अन्य नदी-नालों के किनारे बसी झुग्गियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी-नालों के पास न जाने की अपील की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 19 अगस्त 2025 के लिए कुल्लू जिले में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, जिसके चलते प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने को कहा है।
स्थानीय लोगों में दहशत
बादल फटने की घटना के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। एक स्थानीय महिला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया, "लगातार बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने पूरे प्रदेश में नुकसान पहुंचाया है। रात में बादल फटने की आवाज से लोग डर गए थे।" कनौण गांव के एक युवक ने बताया कि बाढ़ ने गांव का संपर्क काट दिया है, और सड़कों पर बड़े पत्थर जमा होने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
बादल फटने से कनौण गांव में बाग-बगीचों, फसलों, और जमीनों को भारी नुकसान हुआ है। सरवरी में सड़क और पुल के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन ने राजस्व और पुलिस टीमें भेजकर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। राहत और बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ की टीमें भी तैयार हैं, और प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
हिमाचल में बार-बार बादल फटने की घटनाएँ
हिमाचल प्रदेश में इस साल मॉनसून के दौरान बादल फटने की घटनाएँ बार-बार सामने आ रही हैं। कुल्लू, शिमला, लाहौल-स्पीति, और किन्नौर जैसे जिलों में हाल के हफ्तों में कई बार बादल फटने की घटनाएँ हुईं, जिनमें सैकड़ों सड़कें, पुल, और घर क्षतिग्रस्त हुए। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 20 जून से अब तक बारिश से संबंधित घटनाओं में 268 लोगों की मौत हो चुकी है, और 37 लोग लापता हैं। कुल नुकसान का अनुमान 2031 करोड़ रुपये से अधिक है।
जलवायु परिवर्तन का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटने की घटनाएँ जलवायु परिवर्तन और प्रकृति के साथ मानव के असंतुलन का परिणाम हैं। कम समय में छोटे क्षेत्र में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश होने पर बादल फटने की स्थिति बनती है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में कम वायुमंडलीय दबाव के कारण अधिक होती है।



