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दिल्ली में छठ पूजा का भव्य समापन: 1300 घाटों पर उगते सूरज को अर्घ्य, गूंजे छठी मइया के गीत

दिल्ली में छठ पूजा का भव्य समापन: 1300 घाटों पर उगते सूरज को अर्घ्य, गूंजे छठी मइया के गीत

कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर सूर्योपासना का महापर्व छठ पूजा मंगलवार को अपने चरम पर पहुंच गया। दिल्ली के 1300 से अधिक घाटों पर सुबह-सुबह व्रतियों का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर चार दिवसीय उपवास का समापन हुआ। ठंडी सुबह में भी महिलाओं की श्रद्धा गर्माहट बिखेर रही थीं, जो 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद यमुना, हिंदोन और अन्य नदियों के तटों पर खड़ी होकर सूर्य देव की आराधना कर रही थीं। यह दृश्य न केवल धार्मिक उत्साह का प्रतीक था, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी जीवंत प्रमाण।

सूर्योदय का शुभ मुहूर्त सुबह 6:27 बजे था, और इसी समय दिल्ली के प्रमुख घाटों जैसे आईटीओ का हाथी घाट, वासुदेव घाट, कालिंदी कुंज और संगम विहार पर भक्तों ने ठेकुए, फल और नारियल से सजे सूप हाथों में थामे अर्घ्य चढ़ाया। वासुदेव घाट पर विशेष सुरक्षा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। उन्होंने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर देश की प्रगति, शांति और जनकल्याण की प्रार्थना की। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, "छठ महापर्व हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य और सूर्य की किरणों जैसी ऊर्जा का संदेश देता है। सभी व्रतियों को हार्दिक शुभकामनाएं।" इस मौके पर दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आईटीओ के हाथी घाट पर व्रतियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अर्घ्य दिया। उनके साथ कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा, मनजिंदर सिंह सिरसा और रविंद्र इंद्रराज सिंह भी थे। गुप्ता ने कहा, "छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। दिल्ली सरकार ने इस वर्ष 17 प्रमुख यमुना घाटों पर विशेष सफाई अभियान चलाया, ताकि व्रतियों को शुद्ध जल उपलब्ध हो।" पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, जिसमें बैरिकेडिंग, सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी शामिल थी। सौभाग्य से कोई बड़ी घटना नहीं घटी, हालांकि कुछ घाटों पर हल्की भीड़ प्रबंधन की चुनौती रही।

दिल्ली में छठ पूजा की धूम खासतौर पर बिहारी, पूर्वांचली और झारखंडी समुदायों के बीच देखी गई। निजामुद्दीन ब्रिज के पास के घाटों पर पारंपरिक भोजपुरी गीतों की धुन पर महिलाएं नाच-गान कर रही थीं। एक व्रती, रानी देवी ने बताया, "36 घंटे का व्रत कठिन था, लेकिन परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह सब सहज हो जाता है। यमुना के पानी में खड़ी होकर सूर्य को देखना, जैसे जीवन की नई शुरुआत लगती है।" इसी तरह, दिलशाद गार्डन के डियर पार्क में स्थानीय निवासी विजय कुमार ने हवन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया, जहां सैकड़ों लोग जुटे। सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जो इस उत्सव की जीवंतता को दर्शाते हैं।

छठ पूजा का महत्व प्राचीन है। स्कंद पुराण के अनुसार, राजा प्रियव्रत ने संतान प्राप्ति के लिए षष्ठी देवी की आराधना की, जबकि ऋग्वेद में सूर्य पूजा से शारीरिक-मानसिक शुद्धि का वर्णन है। यह पर्व बिना पंडित या मंत्र के मनाया जाता है, जो इसे लोकतांत्रिक बनाता है। गरीब-अमीर सभी इसमें समान भाव से भाग लेते हैं। प्रसाद में ठेकुआ, चावल के लड्डू, केला, सेब, शकरकंद जैसी सात्विक चीजें शामिल होती हैं। मोदी सरकार ने इसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने की कोशिश की है, जो इसकी वैश्विक पहचान को मजबूत करेगी।

दिल्ली के अलावा, पूरे देश में छठ की धूम रही। बिहार के पटना में अटल पथ पर ट्रैफिक जाम लगा, लेकिन प्रशासन ने तुरंत क्लियर किया। यहां 38 जिलों के 70 घाटों पर 12 लाख से अधिक श्रद्धालु जुटे। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 84 घाटों पर गंगा स्नान हुआ, जबकि प्रयागराज और नोएडा में भी लाखों ने भाग लिया। मध्य प्रदेश के भोपाल में पहला छठी मैया मंदिर लोकार्पित हुआ, जहां महापौर मालती राय ने पूजा की। मुंबई-ठाणे में 83 स्थानों पर सामूहिक आयोजन हुए, और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पत्नी के साथ व्रत रखा। झारखंड के रांची में हटनिया तालाब पर रस्में चलीं।

विदेशों में भी भारतीय डायस्पोरा ने उत्सव मनाया। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, फिनलैंड, आयरलैंड और घाना में बिहारी समुदाय ने घाट बनाकर अर्घ्य दिया। जकार्ता (इंडोनेशिया) में महिलाओं का जमावड़ा देखा गया, जबकि फिजी, सूरीनाम और मॉरिशस में बड़े आयोजन हुए। नेपाल के बीरगंज में भी पड़ोसी देश की परंपरा बरकरार रही।

यह महापर्व पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। व्रतियों द्वारा जल प्रदूषण से बचाव और नदियों की सफाई पर जोर दिया जाता है। दिल्ली में इस वर्ष एमसीडी ने 1300 घाटों पर प्लास्टिक-मुक्त अभियान चलाया, जो सराहनीय है। हालांकि, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में यमुना की सफाई पर सवाल उठे, लेकिन उत्सव की सकारात्मक ऊर्जा ने सबको एकजुट कर दिया।

छठ पूजा का समापन होते ही व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण किया और परिवारों में खुशी बांटी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुभकामनाएं दीं, "यह पर्व सूर्य की ऊर्जा से हमें नई प्रेरणा देता है।" आने वाले वर्षों में यह परंपरा और मजबूत हो, यही कामना है। जय छठी मैया!

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