मध्य प्रदेश के महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय 'रण संवाद' सम्मेलन में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने देश की सुरक्षा और रणनीतिक तैयारियों बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है, लेकिन शांति बनाए रखने के लिए सैन्य शक्ति और युद्ध की तैयारी अनिवार्य है। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और भारत की नई रक्षा प्रणाली 'सुदर्शन चक्र' पर भी चर्चा की, जो देश की सुरक्षा को नए आयाम देगी।
जनरल चौहान ने कहा-अगर आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध के लिए तैयार रहें।" उन्होंने कहा, "भारत एक शांतिप्रिय राष्ट्र है, लेकिन इसे शांतिवादी समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। शक्ति के बिना शांति केवल एक कल्पना है।
आपको बत दें सीडीएस ने हालिया ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक आधुनिक संघर्ष था, जिससे भारतीय सेना ने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन से प्राप्त अनुभवों के आधार पर कई सुधार लागू किए जा चुके हैं, जबकि कुछ पर काम चल रहा है। जनरल चौहान ने जोर देकर कहा कि 'रण संवाद' का उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा करना नहीं, बल्कि उससे आगे की रणनीतियों पर विचार-मंथन करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है।
सुदर्शन चक्र: भारत का 'आयरन डोम'
जनरल चौहान ने भारत की महत्वाकांक्षी रक्षा प्रणाली 'सुदर्शन चक्र' पर भी प्रकाश डाला, जिसे भारत का अपना 'आयरन डोम' या 'गोल्डन डोम' कहा जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को इस प्रणाली का जिक्र किया था और उम्मीद जताई थी कि यह 2035 तक तैयार हो जाएगी। यह प्रणाली देश के महत्वपूर्ण सैन्य, नागरिक और राष्ट्रीय स्थलों को सुरक्षित रखने में सक्षम होगी। इसमें हवाई खतरों को पहचानने, ट्रैक करने और निष्क्रिय करने की क्षमता होगी, जिसमें सॉफ्ट स्किल्स, हार्ड स्किल्स, काइनेटिक और डायरेक्ट एनर्जी हथियारों का उपयोग शामिल है।
सीडीएस ने भविष्य के युद्धों के संभावित ट्रेंड्स पर भी चर्चा की।
शक्ति के उपयोग की बढ़ती प्रवृत्ति: राष्ट्र और सरकारें कम समय के संघर्षों के माध्यम से राजनीतिक उद्देश्य हासिल करने के लिए शक्ति का उपयोग कर रही हैं।
युद्ध और शांति के बीच धुंधलापन: आधुनिक युद्धों में युद्ध और शांति के बीच का अंतर मिट गया है। युद्ध अब एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें प्रतियोगिता, संकट, टकराव, संघर्ष और लड़ाई शामिल हैं।
लोगों का महत्व: पहले युद्ध क्षेत्र और विचारधारा के लिए लड़े जाते थे, लेकिन अब लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
जीत के बदलते मायने: पहले जीत का पैमाना सैनिकों या उपकरणों का नुकसान था, जैसे 1971 के युद्ध में 95,000 पाकिस्तानी सैनिकों का आत्मसमर्पण। लेकिन अब जीत की परिभाषा में गति, सटीकता और लंबी दूरी के हमले शामिल हैं।
आत्मनिर्भरता और रणनीतिक सोच
जनरल चौहान ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को सैन्य रणनीति से जोड़ा। उन्होंने कहा कि तकनीकी आत्मनिर्भरता के साथ-साथ विचार और व्यवहार में भी आत्मनिर्भरता जरूरी है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में 'शस्त्र' और 'शास्त्र' दोनों की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि जीत केवल सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि रणनीतिक सोच और मार्गदर्शन से मिलती है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए बताया कि अर्जुन को विजय के लिए श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन की आवश्यकता थी, और चंद्रगुप्त को चाणक्य के ज्ञान ने सम्राट बनाया।
पाकिस्तान को कड़ा संदेश
सीडीएस ने इशारों में पाकिस्तान को चेतावनी दी कि भारत की शांतिप्रियता को कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने 22 अप्रैल के पहलगाम हमले के जवाब में शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेना हर समय तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादी पाकिस्तान में कहीं भी छिप नहीं सकते, और भारतीय सेना को 24 घंटे, 365 दिन किसी भी हिंसक कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा।



