तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर को अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय की राजनीतिक रैली के दौरान हुई भयावह भगदड़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने आज (13 अक्टूबर) फैसला सुनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इस घटना की जांच सौंपने का निर्देश जारी किया है। साथ ही, जांच की निगरानी के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया है। इस हादसे में 41 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए थे।
यह फैसला मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को पलटता है, जिसमें CBI जांच की मांग को खारिज कर तमिलनाडु पुलिस के विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवारों की निष्पक्ष जांच की मांग को स्वीकार करते हुए CBI को तुरंत जांच शुरू करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समिति मासिक रिपोर्ट लेगी और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी तय करेगी। यदि आवश्यक हो, तो मामले को दोबारा कोर्ट में पेश किया जा सकता है।
कैसे मची भगदड़?
तमिलनाडु के करूर जिले में 27 सितंबर को तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) पार्टी के संस्थापक और लोकप्रिय अभिनेता विजय की राजनीतिक रैली का आयोजन किया गया था। रैली में अपेक्षित 10 हजार की संख्या के मुकाबले करीब 27 हजार लोग उमड़ पड़े, जिससे सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई। भारी भीड़ के दबाव में भगदड़ मच गई, जिसमें महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत 41 लोगों की मौत हो गई। घायलों की संख्या 60 से अधिक बताई जा रही है।
ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के एक सदस्य ने बताया, "भीड़ इतनी थी कि सांस लेना मुश्किल हो गया। लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए।" घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल था, और कई लोग छतों पर चढ़कर जान बचाने की कोशिश करते नजर आए। पुलिस ने शुरुआत में इसे 'मानवीय त्रासदी' करार दिया, लेकिन बाद में सुरक्षा लापरवाही के आरोप लगे।
जांच की मांग
घटना के तुरंत बाद TVK ने इसे 'राजनीतिक साजिश' बताते हुए DMK सरकार पर आरोप लगाया। पार्टी ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर कर CBI या SIT से जांच की मांग की। हाईकोर्ट ने 28 सितंबर को सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में न्यायिक जांच का आदेश दिया, लेकिन CBI की मांग खारिज कर दी। इसके साथ ही, TVK के कुछ नेताओं के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई।
हाईकोर्ट ने TVK को फटकार लगाते हुए कहा, "आपने सब कुछ होने दिया। पुलिस आंखें मूंद नहीं सकती।" कोर्ट ने राजनीतिक दलों को राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सार्वजनिक सभाओं पर अंतरिम रोक भी लगाई। असंतुष्ट TVK और BJP नेता उमा आनंदन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने 10 अक्टूबर को सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया। आज के फैसले में कोर्ट ने पीड़ित परिवारों के वकीलों की दलीलों को स्वीकार करते हुए CBI जांच को मंजूरी दी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और मुआवजा
TVK प्रमुख विजय ने घटना के बाद मृतकों के परिवारों से व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बात की और प्रत्येक परिवार को 20 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया। उन्होंने कहा, "यह मानवीय त्रासदी है, लेकिन हम निष्पक्ष जांच चाहते हैं।" वहीं, NDA की जांच समिति ने प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। कमल हासन ने घटनास्थल का दौरा किया और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल उठाए।
तमिलनाडु सरकार ने विजय को अस्पताल जाने से रोका, क्योंकि उनकी मौजूदगी से भीड़ बढ़ सकती थी। पुलिस ने बम की धमकी की जांच भी शुरू की, जिसके बाद विजय के घर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई। BJP ने राज्य सरकार पर 'राजनीतिक हस्तक्षेप' का आरोप लगाया।
क्या होगा अब?
CBI जांच के आदेश से पीड़ित परिवारों में राहत की लहर है। एक परिवार के सदस्य ने कहा, "राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं था। अब न्याय मिलेगा।" कोर्ट ने राजनीतिक रैलियों के लिए SOP बनाने का निर्देश भी दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। TVK ने कहा कि वे कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगे।



