बिहार के भागलपुर में आयोजित वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव के मंच से बृजभूषण शरण सिंह ने ऐसा बयान दिया जिसने सियासी हलचल तेज कर दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को लगता है कि उनका समाज बोझ बन चुका है, तो साफ कह दिया जाए। 2027 या 2029 में बता दें, वे अपनी ताकत दिखा देंगे। उनके इस बयान को सीधा सियासी चेतावनी और शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
क्षत्रिय समाज की अनदेखी का मुद्दा
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि क्षत्रिय समाज को राजनीति में लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आत्ममंथन की बात करते हुए कहा कि जब-जब समाज को दबाया गया, तब वह मौन रहा और यही सबसे बड़ी गलती रही। उन्होंने ऐतिहासिक वीरों और क्रांतिकारियों को उचित सम्मान न मिलने पर भी सवाल उठाए और इसे समाज की कमजोरी बताया।
महापुरुषों के सम्मान पर उठाए सवाल
बृजभूषण ने कहा कि देश की आजादी का श्रेय कुछ नामों तक सीमित कर दिया गया, जबकि कई योद्धाओं को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने झांसी की रानी, कुंवर सिंह और बिरसा मुंडा जैसे नामों का जिक्र करते हुए कहा कि समाज अपने नायकों को उचित स्थान दिलाने में असफल रहा। इसी संदर्भ में उन्होंने एक दोहा सुनाकर मौन रहने को भी अपराध बताया।
संविधान और इतिहास पर बयान
अपने भाषण में उन्होंने संविधान निर्माण को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि यह काम केवल एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि कई लोगों का योगदान था। उन्होंने दावा किया कि उस समय बिहार के प्रतिनिधियों की भूमिका अहम थी, लेकिन उन्हें उतना श्रेय नहीं मिला। इस बयान के बाद उनके विचारों पर नई बहस छिड़ने की संभावना है।
पुराने विवाद और राजनीतिक संकेत
उन्होंने अपने खिलाफ 2023 में हुए विवादों का जिक्र करते हुए इसे षड्यंत्र बताया और कहा कि वे कभी झुके नहीं। ज्ञात हो कि महिला पहलवानों के आरोपों के बाद 2024 चुनाव में उनका टिकट कट गया था। इसके बाद से वे सक्रिय राजनीति में कम नजर आ रहे थे, लेकिन अब उनके बयान से वापसी की तैयारी साफ दिख रही है।
2027-2029 पर नजर, दबाव की रणनीति?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बयान सिर्फ भावनात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। आगामी संगठन और सरकार में फेरबदल से पहले इस तरह के बयान दबाव बनाने की कोशिश हो सकते हैं। साथ ही, अपने परिवार के लिए सियासी जगह बनाने और खुद की वापसी का रास्ता तैयार करने की भी चर्चा तेज हो गई है।
