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राजभर बनाम अखिलेश सीधी टक्कर, पूर्वांचल में 2027 से पहले सियासी भूचाल के संकेत, पढ़ें एक क्लिक में

राजभर बनाम अखिलेश सीधी टक्कर, पूर्वांचल में 2027 से पहले सियासी भूचाल के संकेत, पढ़ें एक क्लिक में

पूर्वांचल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और इसके केंद्र में अखिलेश यादव नजर आ रहे हैं। बलिया की सीमा राजभर को समाजवादी पार्टी की महिला सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना सिर्फ संगठनात्मक फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सीधा राजनीतिक संदेश समझा जा रहा है। इस कदम से ओम प्रकाश राजभर को चुनौती देने की रणनीति साफ दिख रही है।

पुरानी दोस्ती, अब सियासी टकराव
2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर की जोड़ी पूर्वांचल में काफी प्रभावी रही थी। आजमगढ़, गाजीपुर, मऊ और जौनपुर जैसे जिलों में इस गठजोड़ ने बीजेपी को कड़ी चुनौती दी थी। लेकिन चुनाव के बाद राजभर के एनडीए में जाने से समीकरण पूरी तरह बदल गए। यही वह मोड़ था, जहां से सपा ने अपने पुराने सहयोगी को जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी।

सीमा राजभर बनीं नई रणनीति का चेहरा
सीमा राजभर की एंट्री को इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। वह पहले सुभासपा से जुड़ी रही हैं और बलिया जैसे राजभर के गढ़ से आती हैं। उन्होंने खुद राजभर और उनके परिवार पर आरोप लगाकर सपा का दामन थामा था। ऐसे में उन्हें आगे लाकर सपा ने साफ संकेत दिया है कि अब मुकाबला सिर्फ नेताओं का नहीं, बल्कि सीधे वोट बैंक पर कब्जे का है।

विधायकों पर भी सपा की नजर
सियासी गलियारों में चर्चा है कि सपा 2027 से पहले सुभासपा के विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर सकती है। 2022 में सुभासपा के 6 विधायक सपा के समर्थन से जीते थे और उनमें से कई का झुकाव पहले से ही सपा की ओर माना जाता रहा है। अगर यहां टूट होती है तो यह राजभर के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

वोट बैंक ही असली खेल
उत्तर प्रदेश में राजभर समाज की आबादी करीब 2.40 प्रतिशत मानी जाती है, लेकिन पूर्वांचल की 30 से ज्यादा सीटों पर इनका सीधा प्रभाव है। यही वजह है कि इस समाज को साधना किसी भी पार्टी के लिए बेहद अहम माना जाता है। सपा अब इसी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

2027 से पहले बढ़ेगी सियासी गर्मी
समाजवादी पार्टी पहले ही रामशंकर राजभर को सांसद बनाकर संकेत दे चुकी है कि वह इस समाज में पकड़ मजबूत करना चाहती है। अब सीमा राजभर को आगे लाकर रणनीति को और धार दी गई है। वहीं ओम प्रकाश राजभर भी अपने आधार को बचाने में जुटे हैं। साफ है कि यह लड़ाई अब और तेज होगी और 2027 से पहले पूर्वांचल की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

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