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2027 फतह की तैयारी में BJP, क्या है ‘मिशन 57 लोटस’ जिससे तीसरी बार सत्ता का लक्ष्य?

2027 फतह की तैयारी में BJP, क्या है ‘मिशन 57 लोटस’ जिससे तीसरी बार सत्ता का लक्ष्य?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने ‘मिशन 57 लोटस’ के तहत उन 57 सीटों पर विशेष रणनीति बनानी शुरू कर दी है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था। 2017 में बीजेपी ने 312 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में यह संख्या घटकर 255 रह गई थी। अब पार्टी का लक्ष्य इन सभी हारी हुई सीटों पर दोबारा जीत हासिल करना है। पार्टी ने इस अभियान को ‘विजयपथ प्लान’ नाम दिया है और संगठन से लेकर बूथ स्तर तक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार दावा कर रहे हैं कि 2027 में एक बार फिर प्रदेश में बीजेपी सरकार बनेगी।

हारी सीटों के लिए नई रणनीति

बीजेपी ने हारी हुई विधानसभा सीटों पर अलग-अलग प्रभारी नियुक्त करने की तैयारी की है। ये प्रभारी अपने क्षेत्र में संगठन की स्थिति, स्थानीय मुद्दों, सामाजिक समीकरण और बूथ स्तर की गतिविधियों का फीडबैक जुटाएंगे। जरूरत के अनुसार संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का भी जिम्मा इन्हीं के पास होगा। पार्टी ने अयोध्या, आजमगढ़, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल को विशेष फोकस एरिया बनाया है, क्योंकि इन क्षेत्रों में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला था। कमजोर बूथों पर केंद्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं के लगातार प्रवास की भी योजना बनाई जा रही है।

सामाजिक समीकरण साधने की कवायद

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों की समीक्षा के बाद बीजेपी सामाजिक समीकरणों पर भी नए सिरे से काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि कुछ वर्गों में समर्थन कम होने का असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश संगठन में बदलाव, नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति और मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। हाल के कैबिनेट विस्तार में ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और अन्य प्रभावशाली वर्गों के नेताओं को जगह देकर राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास किया गया है। पार्टी अब इसी सामाजिक रणनीति को बूथ स्तर तक पहुंचाने की तैयारी में है।

2027 की जंग पर सभी की नजर

बीजेपी लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संगठनात्मक बैठकों और चुनावी तैयारियों पर लगातार फोकस बनाए हुए हैं। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी पीडीए रणनीति के जरिए अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटी है, जबकि अन्य दल भी चुनावी समीकरण साधने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रणनीतियों की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। आने वाले महीनों में सभी दलों की तैयारियां और चुनावी अभियान इस मुकाबले को और दिलचस्प बना सकते हैं।

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