भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब सिर्फ परिजनों और स्थानीय लोगों की मांग तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। इसी बीच बिहार की बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर के बयान ने इस मुद्दे को नई राजनीतिक चर्चा दे दी है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस केस को लेकर बहस तेज हो गई है।
एनकाउंटर पर क्या है पूरा विवाद?
17 जून को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ के दौरान भरत तिवारी की मौत हुई थी। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई, जबकि परिवार का आरोप है कि भरत ने पहले सरेंडर कर दिया था और उसके बाद गोली मारी गई। विवाद बढ़ने के बाद बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए। साथ ही संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच शुरू की गई है।
नेताओं के बयानों से बढ़ी सियासी हलचल
बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने कहा कि यदि जांच में गलत एनकाउंटर की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। इससे पहले उत्तर प्रदेश के नेता राजा भैया और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी मामले में निष्पक्ष जांच की जरूरत बता चुके हैं। हालांकि ये सभी नेताओं के सार्वजनिक बयान हैं और जांच प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से जारी है।
जांच में किन बिंदुओं पर फोकस?
अब तक की कार्रवाई में न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है। पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और वीडियो समेत अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पुलिस की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी या नहीं। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा।
अब रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
भरत तिवारी मामला अब कानून, जवाबदेही और पुलिस कार्रवाई को लेकर बड़ी परीक्षा बन गया है। एक ओर राजनीतिक दल निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई न्यायिक जांच की अंतिम रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
