logo

BREAKING NEWS
भरत तिवारी केस में बड़ा मोड़, SDPO से थानेदार तक पर केस दर्ज होते ही पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

भरत तिवारी केस में बड़ा मोड़, SDPO से थानेदार तक पर केस दर्ज होते ही पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

भोजपुर के भरत भूषण तिवारी मामले में अब जांच की दिशा बदल गई है। जिस घटना को पहले पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर की कहानी के तौर पर देखा जा रहा था अब उसी मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। भरत की मां आशा देवी की शिकायत पर जगदीशपुर SDPO राजेश शर्मा शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और दूसरे पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। अब जांच यह पता करेगी कि कार्रवाई के दौरान नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

मां ने लगाया सरेंडर के बाद गोली मारने का आरोप

भरत की मां आशा देवी का दावा है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने हथियार छोड़ दिए थे। परिवार का आरोप है कि सरेंडर करने के बाद भी भरत को गोली मार दी गई। शिकायत के अनुसार पुलिस टीम भरत को घर से लेकर जवइनिया इलाके की ओर गई थी। वहां क्या हुआ और किसके आदेश पर कार्रवाई हुई अब इसकी जांच होगी। पुलिस टीम में कौन मौजूद था और किसने क्या भूमिका निभाई यह भी देखा जाएगा।

मोबाइल और वीडियो बन सकते हैं अहम सबूत

इस मामले में डिजिटल सबूत सबसे अहम माने जा रहे हैं। परिवार का कहना है कि घटना से जुड़े दो मोबाइल फोन थे जिनमें से एक पुलिस के पास है। अगर मोबाइल में वीडियो रिकॉर्डिंग कॉल डिटेल लोकेशन या किसी बातचीत का रिकॉर्ड मिला तो पूरा घटनाक्रम सामने आ सकता है। जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि मौके पर मौजूद लोगों ने क्या देखा और क्या किसी ने घटना का वीडियो बनाया था।

न्यायिक जांच के साथ बढ़ी कार्रवाई

सरकार ने पहले ही इस मामले में न्यायिक जांच का आदेश दिया था। अब पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज होने से जांच को कानूनी आधार मिल गया है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जांच निष्पक्ष दिखे और हर सवाल का जवाब सबूत के आधार पर सामने आए। FIR दर्ज होने का मतलब किसी को दोषी ठहराना नहीं होता लेकिन यह जरूर बताता है कि आरोप गंभीर हैं और उनकी जांच जरूरी है।

विपक्ष भी बना रहा है बड़ा मुद्दा

तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव लगातार भरत तिवारी मामले को उठा रहे थे। विपक्ष का सवाल है कि अगर भरत पर कोई आरोप था तो उसे पकड़कर अदालत में पेश क्यों नहीं किया गया। अब पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद विपक्ष सरकार पर दबाव और बढ़ा सकता है। वहीं सरकार के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि जांच में किसी तरह की ढिलाई न दिखे और पीड़ित परिवार को भरोसा मिले।

अब जांच के सामने खड़े हैं पांच बड़े सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भरत ने सच में सरेंडर किया था। गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी। गोली किस दूरी से चली। किस अधिकारी ने आदेश दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच में क्या सामने आएगा। इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि घटना के पीछे सच क्या था। भरत तिवारी केस अब सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं बल्कि बिहार सरकार और पुलिस व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बन गया है।

Leave Your Comment