अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक सोमवार को होने जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों पर फैसला लिया जा सकता है। यदि दोनों इस्तीफे स्वीकार होते हैं तो ट्रस्ट में तीन पद खाली हो जाएंगे, क्योंकि एक पद पहले से ही ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद रिक्त है। ऐसे में नए ट्रस्टियों की नियुक्ति और महासचिव पद पर नए चेहरे को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना तेज हो गई है। इसी बीच बजरंग लाल बागड़ा का नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आया है।
कौन हैं बजरंग लाल बागड़ा?
बजरंग लाल बागड़ा वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री हैं। वे राजस्थान के सीकर जिले के रहने वाले हैं और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे हैं। बागड़ा लंबे समय तक केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) के चेयरमैन रहे हैं। प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन का उनका अनुभव उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा है। नाल्को से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने विहिप में सक्रिय भूमिका निभाई और फरवरी 2024 में संगठन के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चुने गए। संगठन और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ को उनकी बड़ी ताकत माना जा रहा है।
महासचिव पद की दौड़ में तीन नाम
सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के महासचिव पद के लिए तीन नामों पर चर्चा चल रही है। इनमें बजरंग लाल बागड़ा, कृष्णमोहन और विश्व हिंदू परिषद के इंद्रप्रस्थ क्षेत्र के संगठन मंत्री नीरज दौनेरिया शामिल हैं। हालांकि चर्चाओं में सबसे मजबूत दावेदार बजरंग लाल बागड़ा को माना जा रहा है। वहीं नीरज दौनेरिया को ट्रस्टी बनाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज कराने वाले कृष्णमोहन भी इस दौड़ में बताए जा रहे हैं। अंतिम फैसला ट्रस्ट की बैठक में ही होगा, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
बैठक में कई बड़े फैसलों की उम्मीद
यह बैठक चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट की पहली औपचारिक बैठक है, इसलिए इसे बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट पेश किए जाने की भी संभावना है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट, मंदिर की प्रबंधन व्यवस्था में सुधार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति और ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि इस बैठक के फैसले न केवल ट्रस्ट की कार्यप्रणाली बल्कि राम मंदिर के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे की दिशा भी तय कर सकते हैं।
