अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ हाल ही में शुरू की गई सख्त कार्रवाई के तहत, ट्रम्प सरकार ने 2025 के पहले सात महीनों में 1,703 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया है। यह संख्या पिछले सरकार की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है, जो अवैध प्रवास के खिलाफ ट्रम्प की नीतियों की आक्रामकता को दर्शाती है। भारतीय विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से सबसे अधिक लोग पंजाब और हरियाणा राज्यों से हैं।
वहीं भारतीय सरकार ने अवैध प्रवासियों को वापस लेने की प्रक्रिया में अमेरिका के साथ सहयोग किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत उन लोगों को वापस लेने के लिए तैयार है जिनकी नागरिकता की पुष्टि हो जाती है। कई डिपोर्ट किए गए लोग "डनकी रूट" के माध्यम से अमेरिका पहुंचे थे, जिसमें अवैध और जोखिम भरे रास्तों से कई देशों (जैसे कतर, ब्राजील, पेरू, कोलंबिया, पनामा, निकारागुआ, मैक्सिको) के जरिए अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश की जाती है।
डिपोर्टेशन के आंकड़े
आपको बता दें अमेरिका ने 7 महीनों में 1703 भारतीयों को किया डिपोर्ट कर चुका है जिसमें पंजाब: 620, हरियाणा: 604, गुजरात: 245 और जम्मू-कश्मीर के 10 लोग शामिल है। ये आंकड़े जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक के है। आपको बता दें बाइडेन प्रशासन (2020-2024) के दौरान औसतन तीन लोग प्रतिदिन डिपोर्ट किए गए थे, जबकि ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में यह संख्या बढ़कर औसतन आठ लोग प्रतिदिन हो गई है।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया
रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 864 लोग चार्टर्ड और सैन्य विमानों के माध्यम से डिपोर्ट किए गए। इनमें से 333 लोग 5, 15 और 16 फरवरी को अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) द्वारा सैन्य विमानों से वापस भेजे गए। 231 लोग 19 मार्च, 8 जून और 25 जून को ICE चार्टर्ड उड़ानों के माध्यम से डिपोर्ट किए गए। 300 लोग 5 और 18 जुलाई को अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) द्वारा आयोजित उड़ानों से वापस भेजे गए। 747 लोग वाणिज्यिक उड़ानों के माध्यम से, अक्सर व्यक्तिगत रूप से या छोटे समूहों में, डिपोर्ट किए गए। इसके अतिरिक्त, 72 लोग पनामा से वाणिज्यिक उड़ानों के माध्यम से भारत लौटे। अधिकांश डिपोर्टेशन उड़ानें पंजाब के अमृतसर में उतरीं, जिसे लेकर पंजाब के कुछ नेताओं ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए कि केवल अमृतसर को ही क्यों चुना गया।
डिपोर्टेशन के दौरान कई प्रवासियों को हथकड़ी और पैरों में जंजीरें पहनाई गईं, जिसकी भारत में विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और शशि थरूर ने इसे "अमानवीय" करार दिया और भारतीयों के साथ सम्मानजनक व्यवहार की मांग की।
विदेश मंत्रालय का जवाब
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि हथकड़ी और जंजीरें अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) की मानक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत सरकार अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रही है ताकि डिपोर्ट किए गए लोगों के साथ दुर्व्यवहार न हो। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि अमृतसर को डिपोर्टेशन उड़ानों के लिए चुनकर पंजाब को बदनाम किया जा रहा है।
आगामी डिपोर्टेशन
अमेरिका द्वारा 1,703 भारतीयों को डिपोर्ट करना अवैध प्रवास के खिलाफ ट्रम्प सरकार की सख्त नीतियों का हिस्सा है। अमेरिका ने 487 और भारतीयों को डिपोर्ट करने की सूचना दी है, जिनकी पहचान हो चुकी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि इनकी संख्या बढ़ सकती है। भारत सरकार अवैध प्रवास को रोकने और सुरक्षित, व्यवस्थित और कानूनी प्रवास को बढ़ावा देने के लिए नए आव्रजन कानून लाने की योजना बना रही है। भारत सरकार अमेरिका के साथ सहयोग करके एच-1बी वीजा जैसे कानूनी प्रवास के रास्तों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है, जो भारतीय पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण है।



