अमेरिकी सेना ने कैरिबियन सागर में वेनेजुएला से रवाना हुए एक जहाज पर हमला किया, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई। इस हमले की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे ट्रूथ सोशल और इंस्टाग्राम पर की।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह हमला उनके सीधे आदेश पर किया गया और इसका उद्देश्य वेनेजुएला के कुख्यात नार्को-आतंकी संगठन "ट्रेन डे अरागुआ" (TDA) को निशाना बनाना था। इस संगठन पर नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी का आरोप हैं।
हमले के दौरान जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था और ट्रंप के अनुसार, यह नशीले पदार्थों को लेकर अमेरिका की ओर बढ़ रहा था। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस कार्रवाई को "घातक हमला" करार देते हुए कहा कि जहाज का संचालन एक नार्को-आतंकी संगठन द्वारा किया जा रहा था। इस ऑपरेशन में किसी भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा।
इस हमले से पहले, अमेरिका ने कैरिबियन सागर में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत किया था। अमेरिकी नौसेना ने चार विध्वंसक (डिस्ट्रॉयर) और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों के साथ 4,500 से अधिक सैनिकों और मरीनों को तैनात किया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह तैनाती लैटिन अमेरिकी ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ कार्रवाई और नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए है।
वेनेजुएला की प्रतिक्रिया
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे अपनी सरकार को अस्थिर करने की साजिश करार दिया। मादुरो ने एक दिन पहले, 1 सितंबर 2025 को, अमेरिका पर उनकी सरकार को सत्ता से हटाने के लिए सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने कैरिबियन में हमला किया, तो वे वेनेजुएला को "हथियारबंद गणराज्य" घोषित करेंगे और अपनी सेना के साथ-साथ नागरिक मिलिशिया को हथियार उठाने का आह्वान करेंगे। मादुरो ने वेनेजुएला की समुद्री सीमा और कोलंबिया से सटी सीमा पर सैनिक तैनात कर दिए हैं और नागरिकों से मिलिशिया में शामिल होने की अपील की है।
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव कोई नया नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने लंबे समय से मादुरो पर ड्रग तस्करी को बढ़ावा देने और उनकी सरकार को गैरकानूनी करार देने का आरोप लगाया है। इस साल अगस्त में, अमेरिका ने मादुरो को गिरफ्तार करने के लिए 50 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया था। मादुरो ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर नियंत्रण चाहता है, जिसे उन्होंने सरकारीकरण कर लिया था। 2018 के राष्ट्रपति चुनाव में कथित धांधली के बाद से अमेरिका ने मादुरो की सरकार को मान्यता नहीं दी और विपक्षी नेता जुआन गुआइदो को समर्थन दिया।
चीन ने अमेरिका की इस सैन्य तैनाती की निंदा की है और इसे वेनेजुएला के खिलाफ "विदेशी हस्तक्षेप" करार दिया है। मादुरो ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि अमेरिका को कैरिबियन से अपनी सैन्य तैनाती वापस लेने के लिए कहा जाए। यह हमला अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव को और बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। मादुरो ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है।



