आज के समय में ज्यादातर लोग नौकरी की तलाश के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। कंपनियां भी वेबसाइट और ऐप के जरिए भर्ती करती हैं। लेकिन इसी का फायदा साइबर ठग उठा रहे हैं। अब ठगी का नया तरीका सामने आया है, जिसमें ऑनलाइन इंटरव्यू और नौकरी के नाम पर लोगों की निजी जानकारी हासिल की जा रही है। इस नए खतरे को एआई बायोमेट्रिक स्कैम कहा जा रहा है। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को खास सावधानी बरतने की जरूरत है।
कैसे फंसाते हैं ठग?
इस तरह की ठगी में साइबर अपराधी पहले किसी बड़ी या भरोसेमंद कंपनी के नाम से फर्जी नौकरी का विज्ञापन डालते हैं। जब कोई उम्मीदवार आवेदन करता है तो उसे इंटरव्यू या वेरिफिकेशन के नाम पर कुछ प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा जाता है। इसी दौरान उससे आधार, बायोमेट्रिक, वीडियो वेरिफिकेशन या दूसरी निजी जानकारी मांगी जाती है। जैसे ही व्यक्ति यह जानकारी साझा करता है, उसका डेटा सीधे ठगों के हाथ लग जाता है।
सरकार ने जारी की चेतावनी
गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने लोगों को इस तरह के स्कैम से सावधान रहने की सलाह दी है। एजेंसी का कहना है कि असली कंपनियां भर्ती प्रक्रिया के दौरान संदिग्ध तरीके से निजी जानकारी नहीं मांगतीं और न ही किसी पर तुरंत फैसला लेने का दबाव बनाती हैं। इसलिए किसी भी नौकरी के ऑफर को आंख बंद करके सही मान लेना भारी पड़ सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
अगर कोई नौकरी का ऑफर मिले तो सबसे पहले कंपनी और भर्ती करने वाले व्यक्ति की जानकारी की जांच करें। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, ईमेल आईडी और दूसरे विवरण जरूर देखें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने या जल्दबाजी में दस्तावेज भेजने से बचें। अगर इंटरव्यू या वेरिफिकेशन प्रक्रिया असामान्य लगे तो उसकी पुष्टि जरूर करें। बिना पूरी जांच के आधार, बैंक खाते या दूसरी निजी जानकारी साझा न करें।
बायोमेट्रिक सुरक्षा भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल में मौजूद एम-आधार ऐप के जरिए बायोमेट्रिक लॉक सुविधा चालू कर देना चाहिए। इससे आपकी बायोमेट्रिक जानकारी सुरक्षित रहती है और कोई उसका गलत इस्तेमाल नहीं कर पाता। यह छोटा सा कदम आपको बड़ी परेशानी से बचा सकता है। खासकर नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए यह सुरक्षा बेहद जरूरी मानी जा रही है।
ठगी होने पर क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति के साथ इस तरह की ठगी हो जाती है तो उसे तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है या 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके मदद ली जा सकती है। समय रहते शिकायत करने से नुकसान को कम किया जा सकता है और अपराधियों तक पहुंचने में एजेंसियों को मदद मिलती है। नौकरी की तलाश जरूरी है, लेकिन सतर्क रहना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
