देश में घटती जन्म दर को बढ़ाने के लिए पड़ोसी देश चीन सरकार ने एक नई योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत, 1 जनवरी 2025 से जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे के लिए माता-पिता को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का मुख्य कारण जो वर्तमान में 1.09 पर है। इसे 2.1 तक ले जाना है, ये आंकड़ा जनसंख्या स्थिरता के लिए आवश्यक माना जाता है।
सरकार का कहना है कि प्रत्येक बच्चे के जन्म पर माता-पिता को हर साल 3,600 युआन भारतीय रुपयों मे बोले को (लगभग 42,000) की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि बच्चे के तीन साल की उम्र तक प्रदान की जाएगी, जिससे कुल राशि लगभग 1.26 लाख से 1.30 लाख तक होगी। आपको बता दें यह योजना 1 जनवरी 2025 से प्रभावी होगी और इसमें सभी बच्चे, जिसमें पहला बच्चा भी शामिल है, शामिल होंगे। पहले की क्षेत्रीय योजनाओं के विपरीत, यह एक राष्ट्रीय स्तर की पहल है।
बता दें चीन पिछले कुछ वर्षों से घटती जन्म दर और बढ़ती बुजुर्ग आबादी की समस्या से जूझ रहा है। 2024 में, देश में केवल 95.4 लाख बच्चे पैदा हुए, जो 2016 में 'वन चाइल्ड पॉलिसी' समाप्त होने के समय की तुलना में लगभग आधा है। 2024 में जनसंख्या 140.8 करोड़ थी, जो लगातार तीसरे वर्ष कम हुई। यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था और कार्यबल के लिए चुनौती बन रही है।
क्यों जरूरी है यह कदम?
घटती जन्म दर के कारण श्रम शक्ति में कमी आ रही है, जो चीन की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनसंख्या में कमी जारी रही, तो कंपनियां निवेश से हिचकेंगी, जिससे नौकरियां और आर्थिक स्थिरता प्रभावित होगी।'वन चाइल्ड पॉलिसी' (1980-2016) के कारण छोटे परिवारों की संस्कृति विकसित हुई, और लैंगिक असंतुलन बढ़ा। अब सरकार 'थ्री चाइल्ड पॉलिसी' के तहत अधिक बच्चे पैदा करने के लिए सामाजिक माहौल तैयार करने की कोशिश कर रही है।दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों ने भी जन्म दर बढ़ाने के लिए समान कदम उठाए हैं, जिनमें मिश्रित परिणाम मिले हैं। दक्षिण कोरिया में 3.1% की जन्म दर वृद्धि देखी गई, जबकि जापान ने चाइल्डकेयर सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया।



