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महागठबंधन में फूट या फॉर्मूला? गहलोत बोले—कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में होगा बड़ा खुलासा

महागठबंधन में फूट या फॉर्मूला? गहलोत बोले—कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में होगा बड़ा खुलासा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की दहलीज पर खड़े होने के बीच महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) में सीट बंटवारे को लेकर बढ़ते तनाव ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। नामांकन की अंतिम तिथि पर ही गठबंधन के घटक दलों ने अलग-अलग उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी, जिससे 243 सीटों पर 254 नामांकन हो गए। इस कलह को दूर करने के लिए कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पटना भेजा। बुधवार को गहलोत ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की। बैठक के बाद गहलोत ने आश्वासन दिया कि गुरुवार को होने वाली संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सब कुछ साफ हो जाएगा।

बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, लेकिन महागठबंधन के भीतर आंतरिक कलह ने विपक्षी एकता को चुनौती दे दी है। आरजेडी ने 143 सीटों पर, कांग्रेस ने 61 पर, वाम दलों ने 30 और वीआईपी ने 9 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। लेकिन समस्या तब पैदा हुई जब कई सीटों पर गठबंधन के घटक दल एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर आए। सूत्रों के अनुसार, कम से कम 13 सीटों पर विवाद फंसा हुआ है, जिनमें से चार पर आरजेडी और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। अन्य सीटों पर वीआईपी और वाम दलों के उम्मीदवारों के बीच टकराव देखा गया।

नामांकन की अंतिम तिथि (22 अक्टूबर) पर यह स्थिति तब बनी जब केंद्रीय स्तर पर सीट बंटवारे की अंतिम सहमति नहीं बन पाई। कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने इसे 'उत्साहपूर्ण नामांकन' करार दिया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे गठबंधन की कमजोरी बताया। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेता आनंद मोहन ने व्यंग्य कसते हुए कहा, "महागठबंधन वाले एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं, इससे उनका उत्साह ही कम हो गया है।"

इस बीच, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने विवाद को हवा देते हुए कहा कि बिहार की जनता राहुल गांधी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर देखना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि राहुल के नेतृत्व में ही इंडिया गठबंधन सत्ता हासिल कर सकता है। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने तेजस्वी यादव को ही मजबूत विकल्प बताते हुए कहा, "तेजस्वी का कोई विकल्प नहीं है।"

संकटमोचक के रूप में पटना पहुंचे

कांग्रेस आलाकमान ने स्थिति को भांपते हुए अशोक गहलोत को बिहार का पर्यवेक्षक नियुक्त किया। गहलोत, जो गठबंधन राजनीति के सिद्धहस्त माने जाते हैं, मंगलवार रात पटना पहुंचे। बुधवार सुबह उन्होंने सबसे पहले तेजस्वी यादव के 10, सरायकेलान घर पर पहुंचकर करीब एक घंटे की बैठक की। इसके बाद वे लालू प्रसाद यादव से मिले, जहां गहन चर्चा हुई। बैठक में सीट बंटवारे के अलावा साझा घोषणा पत्र, चुनाव प्रचार की रणनीति और संभावित मुख्यमंत्री चेहरे पर भी बात हुई।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "243 सीटों वाले राज्य में 5-10 सीटों पर मतभेद कोई बड़ी बात नहीं। कुछ नेता उत्साह में नामांकन कर बैठे, लेकिन सब ठीक हो जाएगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि महागठबंधन में कोई कन्फ्यूजन नहीं है, बस कुछ सीटों पर टेंशन है। "5-10 सीटों पर फ्रेंडली फाइट हो सकती है, लेकिन कल प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सब साफ हो जाएगा।" गहलोत ने यह भी संकेत दिया कि नाम वापसी की अंतिम तिथि (23 अक्टूबर) से पहले ज्यादातर विवाद सुलझा लिए जाएंगे।

तेजस्वी यादव ने भी बैठक के बाद मीडिया से कहा, "सीट बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है। कल सभी जवाब मिल जाएंगे।" आरजेडी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद केसी त्यागी ने तेजस्वी को सीएम चेहरा बनाने की संभावना पर टिप्पणी करते हुए कहा, "इस दिन का इंतजार पार्टी कई दिनों से कर रही है। अगर तेजस्वी चेहरा बनते हैं तो वो हमारे लिए शुभ घड़ी होगी।"

कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस

महागठबंधन की ओर से गुरुवार सुबह 11 बजे पटना में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया है। इस कॉन्फ्रेंस में आरजेडी, कांग्रेस, वाम दलों और वीआईपी के शीर्ष नेता शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक, यहां सीट बंटवारे की अंतिम सूची जारी की जा सकती है, साथ ही तेजस्वी यादव को औपचारिक रूप से गठबंधन का मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जा सकता है। कांग्रेस को इससे ऐतराज नहीं है, हालांकि पार्टी में दो राय हैं। प्रभारी अल्लावरु और पप्पू यादव जैसे नेता राहुल गांधी को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन सांसद सिंह जैसे नेताओं का समर्थन तेजस्वी के पक्ष में है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद महागठबंधन चुनाव प्रचार की औपचारिक शुरुआत करेगा। संभावना है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी तेजस्वी के साथ संयुक्त सभा को संबोधित करेंगे। यह कदम गठबंधन की एकता को मजबूत करने और एनडीए के खिलाफ एकजुट मोर्चा बनाने का प्रयास होगा। बिहार में पहले चरण का मतदान 27 अक्टूबर को है, और प्रचार का समय तेजी से घट रहा है।

एनडीए की मजबूती, विपक्ष की चुनौतियां

बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव चार चरणों में होगा, जिसमें कुल 6 करोड़ से अधिक मतदाता भाग लेंगे। एनडीए (बीजेपी-जेडीयू-हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) ने सीट बंटवारा पहले ही तय कर लिया है, जहां बीजेपी 160 और जेडीयू 80 सीटों पर लड़ेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एनडीए का सीएम चेहरा बनाया गया है, जो विकास और सुशासन के मुद्दों पर प्रचार करेंगे।

वहीं, महागठबंधन जातिगत समीकरणों पर निर्भर है। आरजेडी मुस्लिम-यादव वोट बैंक को मजबूत करने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस ब्राह्मण और अन्य पिछड़ा वर्ग को लक्षित कर रही है। लेकिन आंतरिक कलह ने गठबंधन की साख को नुकसान पहुंचाया है। राजनीतिक विश्लेषक डॉ. प्रोफेसर राम पुनियानी कहते हैं, "सीट विवाद से मतदाओं में भ्रम पैदा होता है, जो एनडीए के पक्ष में जा सकता है। लेकिन अगर कल की कॉन्फ्रेंस में एकता का मजबूत संदेश दिया गया, तो विपक्ष पुनरुद्धार कर सकता है।"

महागठबंधन ने साझा घोषणा पत्र में 'संविदाकर्मी और जीविका दीदी को स्थायी नौकरी' और 'हर परिवार में एक सरकारी नौकरी' जैसे वादे किए हैं, जो युवाओं को आकर्षित कर सकते हैं। तेजस्वी ने हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हम बिहार को रोजगार का हब बनाएंगे।" लेकिन सीट विवाद ने इन वादों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए हैं।

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