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डिजिटल ठगी से हर घंटे करोड़ो लुट रहे - रिपोर्ट

डिजिटल ठगी से हर घंटे करोड़ो लुट रहे - रिपोर्ट

भारत में डिजिटल क्रांति ने बैंकिंग और भुगतान व्यवस्था को बेहद आसान बना दिया है। मोबाइल फोन से कुछ सेकंड में पैसा भेजना आज आम बात हो गई है। लेकिन इसी डिजिटल सुविधा के साथ एक बड़ा खतरा भी तेजी से बढ़ा है—साइबर ठगी। हालिया आंकड़े बताते हैं कि देश में साइबर अपराधियों का नेटवर्क पहले से कहीं अधिक संगठित और तेज हो चुका है।

हर दिन करोड़ों रुपये की साइबर ठगी

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) के डेटा के अनुसार भारत में रोजाना हजारों लोग साइबर धोखाधड़ी का शिकार बन रहे हैं। औसतन हर दिन हजारों शिकायतें दर्ज होती हैं और करोड़ों रुपये की ठगी सामने आती है।

कई मामलों में पीड़ितों की मेहनत की कमाई कुछ ही मिनटों में अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है। एजेंसियां कोशिश करती हैं कि रकम को जल्दी फ्रीज कराया जाए, लेकिन साइबर अपराधियों की तेज रणनीति के कारण बड़ी राशि अक्सर रिकवर नहीं हो पाती।

पांच साल में साइबर ठगी का विस्फोट

आधिकारिक रिपोर्टों से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराधों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। डिजिटल भुगतान के तेजी से फैलाव के साथ-साथ ठगों के तरीके भी अधिक जटिल होते गए हैं।

साइबर ठगी की शिकायतें (अनुमानित सरकारी आंकड़े):

वर्षदर्ज शिकायतें
20212.6 लाख से अधिक
2022लगभग 6.9 लाख
2023करीब 13 लाख
2024लगभग 19 लाख
202524 लाख से अधिक

इन आंकड़ों से साफ है कि कुछ ही वर्षों में शिकायतों की संख्या कई गुना बढ़ गई है।

ठगी की रकम भी बढ़ती गई

केवल मामलों की संख्या ही नहीं, बल्कि ठगी की रकम भी तेजी से बढ़ी है।

वर्षअनुमानित ठगी
2021लगभग ₹550 करोड़
2022लगभग ₹2,290 करोड़
2023करीब ₹7,400 करोड़
2024₹22,000 करोड़ से अधिक
2025लगभग ₹22,000 करोड़ के आसपास

हालांकि कई मामलों में बैंक और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से कुछ रकम बचाई भी जाती है, लेकिन कुल नुकसान अभी भी बहुत बड़ा है।

साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार: म्यूल अकाउंट

साइबर अपराध में एक प्रमुख तकनीक “म्यूल अकाउंट” है। इसमें ठग ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं जो किसी और व्यक्ति के नाम पर होते हैं।

ठगी की रकम पहले इन खातों में डाली जाती है और फिर तुरंत कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है। इससे पैसे का असली ट्रैक पकड़ना मुश्किल हो जाता है। जांच एजेंसियां अब ऐसे खातों की पहचान करने के लिए विशेष डेटा-विश्लेषण तकनीकों का उपयोग कर रही हैं।

सरकार का टेक्नोलॉजी आधारित जवाब

साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार ने कई संस्थागत कदम उठाए हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका Indian Cyber Crime Coordination Centre निभा रहा है।

इसके साथ एक विशेष Cyber Fraud Mitigation Centre बनाया गया है, जहां पुलिस, बैंक और टेलीकॉम कंपनियों के प्रतिनिधि मिलकर काम करते हैं। जैसे ही किसी धोखाधड़ी की शिकायत आती है, संबंधित खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाती है।

हेल्पलाइन और पोर्टल की भूमिका

साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करने के लिए सरकार ने एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन शुरू की है।

हेल्पलाइन नंबर: National Cyber Crime Helpline 1930

ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: National Cyber Crime Reporting Portal

अगर पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज करता है तो कई मामलों में पैसे को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सकता है।

एआई और मशीन लर्निंग की मदद

अब बैंकिंग सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है।

AI आधारित सिस्टम इन चीजों की निगरानी करते हैं:

असामान्य ट्रांजैक्शन पैटर्न

अचानक बड़ी रकम का ट्रांसफर

अलग लोकेशन से लॉगिन

उपयोगकर्ता के व्यवहार में बदलाव

जैसे ही सिस्टम को कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तुरंत अलर्ट जारी हो जाता है और बैंक ट्रांजैक्शन रोक सकता है।

डिजिटल भारत के साथ नई जिम्मेदारी

भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा नेटवर्क National Payments Corporation of India के जरिए संचालित होता है, जिसने UPI जैसी प्रणालियों को लोकप्रिय बनाया है।

डिजिटल सुविधाओं ने लोगों की जिंदगी आसान जरूर की है, लेकिन इसके साथ डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल तकनीक से नहीं जीती जा सकती, इसके लिए आम लोगों की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।

भारत में साइबर ठगी अब एक गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौती बन चुकी है। तेजी से बढ़ती शिकायतें यह संकेत देती हैं कि अपराधी डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों का लगातार फायदा उठा रहे हैं।

हालांकि सरकार, बैंक और तकनीकी एजेंसियां मिलकर इस खतरे से निपटने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अंतिम सुरक्षा तभी संभव है जब डिजिटल उपयोगकर्ता भी सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या मैसेज से सावधान रहें।

Ankit Awasthi

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