उत्तर प्रदेश की योगी आदিत्यनाथ सरकार ने रविवार को एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 8 आईपीएस (IPS) अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए। इस तबादले में शामली, कानपुर देहात, और श्रावस्ती जैसे तीन प्रमुख जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को बदला गया है। यह कदम राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने तथा प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
शामली जिले के एसपी को बदलकर नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। नए एसपी के नाम की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, यह कदम जिले में हाल के प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को देखते हुए उठाया गया है। कानपुर देहात के एसपी को भी स्थानांतरित किया गया है। इस जिले में कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए एक अनुभवी अधिकारी को नियुक्त किया गया है। श्रावस्ती जिले के पुलिस अधीक्षक को नई जिम्मेदारी दी गई है। इस तबादले का उद्देश्य जिले में पुलिस प्रशासन को और प्रभावी बनाना है।
इसके अलावा, अन्य 5 आईपीएस अधिकारियों को भी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर स्थानांतरित किया गया है, जिनमें कुछ को पुलिस मुख्यालय और अन्य प्रशासनिक इकाइयों में तैनात किया गया है। तबादला सूची में शामिल अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नए पदों पर कार्यभार संभालने का निर्देश दिया गया है।
आपको बता दें हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश सरकार ने कई बार आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। मई 2025: 14 आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया, जिसमें अयोध्या और गोरखपुर जैसे संवेदनशील जिलों के एसपी बदले गए। अयोध्या के एसपी राजकिरण अय्यर को गोरखपुर और गोरखपुर के एसपी डॉ. गौरव ग्रोवर को अयोध्या स्थानांतरित किया गया।
अप्रैल 2025: 15 आईपीएस अधिकारियों का तबादला हुआ, जिसमें 7 जिलों (झांसी, महोबा, बांदा, सीतापुर, पीलीभीत, फर्रुखाबाद, और कानपुर देहात) के एसपी बदले गए। जुलाई 2024: 8 आईपीएस अधिकारियों के तबादले में फतेहपुर और कुशीनगर के एसपी बदले गए, जिसमें धवल जयसवाल को फतेहपुर का नया एसपी बनाया गया।
इन तबादलों को लेकर पुलिस और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में अनुभवी और काबिल अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है। खास तौर पर, आगामी महाकुंभ 2026 जैसे बड़े आयोजनों को देखते हुए पुलिस प्रशासन को और चुस्त करने की कोशिश की जा रही है।



