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हिमाचल के शिमला में भूस्खलन से 4 की मौत, चार धाम यात्रा 5 सितंबर तक स्थगित

हिमाचल के शिमला में भूस्खलन से 4 की मौत, चार धाम यात्रा 5 सितंबर तक स्थगित

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में चार लोगों की मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। यह हादसा शिमला के रामपुर क्षेत्र में हुआ, जहां भारी बारिश और भूस्खलन के कारण कई लोग मलबे में दब गए।

मृतकों में एक मां-बेटी की जोड़ी भी शामिल है, जो पराड़ी खड्ड में बह गई थी। इसके अलावा, रामपुर के तकलेच में खाल्टुनाला में एक 20 वर्षीय युवती पर पत्थर गिरने से उसकी मौत हो गई। चंबा जिले के भरमौर में मणिमहेश यात्रा के दौरान भी एक श्रद्धालु की पत्थर गिरने से मृत्यु हो गई।

राज्य में भारी बारिश के कारण सैकड़ों सड़कें बंद हो गई हैं, जिनमें दो राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं। शिमला, कुल्लू, मंडी और चंबा जैसे जिलों में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग ने शिमला, कांगड़ा, चंबा, और लाहौल-स्पीति सहित कई जिलों में भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है। स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, बिजली, और जलापूर्ति व्यवस्था को बहाल करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण यह कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जलवायु परिवर्तन को इस बढ़ती आपदा का प्रमुख कारण बताया है और केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की एक टीम ने राज्य में आपदा के प्रभावों का अध्ययन किया है, और जल्द ही इसका समाधान निकाला जाएगा। इस मॉनसून सीजन में अब तक हिमाचल में 317 लोगों की मौत हो चुकी है, और 2,100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा स्थगित

उत्तराखंड में भी भारी बारिश और भूस्खलन के कारण चार धाम यात्रा (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, और यमुनोत्री) को 5 सितंबर 2025 तक स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, क्योंकि यात्रा मार्गों पर भूस्खलन जोन और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। उत्तराखंड पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल यात्रा मार्ग पर भूस्खलन जोन की संख्या 35 से बढ़कर 60 हो गई है, जबकि दुर्घटना संभावित क्षेत्र 80 से 120 हो गए हैं।

हाल ही में चमोली जिले के माणा गांव के पास हुए एक हिमस्खलन में 4 मजदूरों की मौत हो गई थी, और 5 अन्य की तलाश जारी है। इस घटना ने यात्रा मार्गों की जोखिम भरी स्थिति को और उजागर किया है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश और ग्लेशियर फटने की आशंका जताई है, जिसके चलते प्रशासन ने यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया गया है, जिसमें यात्रा मार्ग पर 69 डॉक्टर, 121 स्टाफ नर्स, और 309 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की गई है।

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