दिल्ली-एनसीआर के व्यस्त ट्रैफिक में फंसे यात्रियों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है। अब 3 घंटे लगने वाला सफर, जैसे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआई) से आनंद विहार, नोएडा या गाजियाबाद तक का रोड जर्नी, मात्र 10-12 मिनट में पूरा हो सकेगा। यह संभव होगा भारत की पहली स्वदेशी इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (ईवीटीओएल) एयर टैक्सी के जरिए।
मोहाली स्थित स्टार्टअप नलवा एयरो द्वारा विकसित इस एयर टैक्सी को 2028 तक दिल्ली में लॉन्च करने की योजना है। शुरुआती किराया मात्र 500 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है, जो मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के लिए सुलभ हवाई यात्रा का द्वार खोलेगा।
यह परियोजना न केवल शहरी गतिशीलता को नया आयाम देगी, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल और लागत-प्रभावी हवाई परिवहन को बढ़ावा भी देगी। नागर विमानन मंत्रालय और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की मंजूरी के साथ आगे बढ़ रही इस पहल से दिल्ली-एनसीआर में हजारों नौकरियां पैदा होंगी और चिकित्सा आपातकाल में जीवन रक्षा में भी क्रांति आएगी। नलवा एयरो के सीईओ कुलजीत सिंह संधू ने कहा, "हमने ऐसी मशीन बनाई है जो कहीं भी वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग कर सके। कोविड महामारी के दौरान एक मित्र की आपातकालीन मेडिकल इवैक्यूएशन की समस्या ने हमें यह विचार दिया, जब हेलीपैड की कमी ने चुनौतियां पैदा कीं।"
ईवीटीओएल तकनीक
नलवा एयरो की ईवीटीओएल एयर टैक्सी 'शुंया' (जैसा कि प्रोटोटाइप का नाम है) पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन पर आधारित है। इसमें 8-रोटर सिस्टम लगा है, जो इसे हेलीकॉप्टर से कहीं अधिक सुरक्षित बनाता है। संधू के अनुसार, "यदि दो रोटर फेल हो जाएं तो भी विमान सुरक्षित उड़ान जारी रख सकता है, और तीन रोटर बंद होने पर भी सुरक्षित लैंडिंग संभव है।" यह तकनीक अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) और यूरोपीय यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (ईएएसए) के मानकों पर खरी उतरती है।
विमान दो मुख्य मॉडल पर काम कर रहा है: लिथियम-आयन बैटरी वाला, जो एक चार्ज पर 90 मिनट या 300 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है (फास्ट चार्जिंग में मात्र 50 मिनट लगते हैं), और हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाला, जो 800 किलोमीटर तक की रेंज प्रदान करता है। क्रूज स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा (अधिकतम 400 किमी/घंटा) है, और अधिकतम टेकऑफ वजन 4000 किलोग्राम के साथ 1000 किलोग्राम पेलोड ले जा सकता है। उन्नत फ्लाइंग कंप्यूटर, टिल्टिंग प्रोपल्शन सिस्टम और बॉक्स-विंग डिजाइन इसे अत्याधुनिक बनाते हैं।
पर्यावरण के लिहाज से यह जीरो-कार्बन है—कोई एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) नहीं, सिर्फ बिजली या हाइड्रोजन। यह हेलीकॉप्टर से 10 गुना शांत है और संचालन लागत 90% कम (हेलीकॉप्टर की प्रति घंटा 5 लाख रुपये की लागत के मुकाबले ईवीटीओएल की 10% से कम)। 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत 60% तकनीक घरेलू है, जो आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेगी। कंपनी ने पायलट-आधारित और ऑटोनॉमस (पायलटलेस) दोनों फ्लाइट टेक्नोलॉजी में सफलता हासिल की है। कार्गो फ्लाइट्स पहले ही ऑटोनॉमस हो सकती हैं।
दिल्ली-एनसीआर से शुरुआत
दिल्ली-एनसीआर में शुरुआती फोकस आईजीआई एयरपोर्ट से आनंद विहार, नोएडा, गाजियाबाद या पानीपत जैसे स्थानों पर होगा। वर्तमान में रोड पर 1-3 घंटे लगने वाला यह सफर एयर टैक्सी से मात्र 10-12 मिनट में पूरा हो जाएगा। इसके बाद मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे महानगरों में विस्तार होगा। ईवीटीओएल की खासियत यह है कि यह किसी भी जगह से वर्टिकल टेकऑफ-लैंडिंग कर सकता है—बिल्डिंग की छतों या मेट्रो स्टेशनों पर भी।
शहरी बुनियादी ढांचे को अनुकूलित करने की योजना है। सरकारी स्तर पर हर 50 किलोमीटर पर 1000 हेलीपैड विकसित हो रहे हैं, जिन्हें वर्टीपोर्ट्स में बदला जा सकता है। हेलीकॉप्टर को 20x25 मीटर जगह चाहिए, जबकि ईवीटीओएल को मात्र 12x12 मीटर। इससे शहरी स्थानों में आसानी से तैनाती संभव होगी। दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहे लाखों लोग अब 'ऑन-डिमांड' हवाई टैक्सी बुक कर सकेंगे, जैसे उबर या ओला।
शुरुआती किराया मात्र 500 रुपये
शुरुआती किराया आईजीआई से आनंद विहार के लिए 500 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है, जो इसे लोकतांत्रिक बनाएगा। लंबे समय में यह मेडिकल इमरजेंसी में जान बचा सकता है—दो स्ट्रेचर वाले एंबुलेंस मॉडल से मरीजों को तेजी से अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। नलवा एयरो तीन मुख्य वेरिएंट विकसित कर रही है: 5-7 सीटों वाली पैसेंजर एयर टैक्सी, कार्गो वर्जन और एंबुलेंस। इसके अलावा एयर टूरिज्म, निगरानी-रिकॉन्सेंस और मेडिवैक (मेडिकल इवैक्यूएशन) के लिए विशेष विमान भी बन रहे हैं।
यह परियोजना हजारों रोजगार सृजित करेगी—नए स्किल्स जैसे पायलट ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में। गुजरात और आंध्र प्रदेश में सैंडबॉक्स ट्रायल साइट्स तैयार हो रही हैं, जहां वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम साझेदार है। पहले 3 साल पायलट-आधारित पैसेंजर फ्लाइट्स होंगी, उसके बाद डीजीसीए सर्टिफिकेशन के बाद ऑटोनॉमस फ्लाइट्स पर विचार होगा।
हालांकि बुनियादी ढांचे की कमी एक चुनौती है, लेकिन कोविड के सबक से प्रेरित होकर कंपनी ने इसे दूर करने की योजना बनाई है। डिजाइन फेज पूरा हो चुका है, और अगले महीने सब-स्केल प्रोटोटाइप लॉन्च होगा। वैश्विक स्तर पर ईवीटीओएल क्रांति आ रही है—दुबई और अमेरिका में पहले ही टेस्ट हो रहे हैं। भारत में यह न केवल ट्रांसपोर्टेशन, बल्कि डिफेंस, सर्च एंड रेस्क्यू और कार्गो सेक्टर को बदल देगा।



