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Gold-Silver में भारी गिरावट क्यों? जानें तीन प्रमुख वजहें

Gold-Silver में भारी गिरावट क्यों? जानें तीन प्रमुख वजहें

सोमवार को सोने की कीमत में 3,034 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी 3,135 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हुई। यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है, खासकर उन लोगों के लिए जो दिवाली से पहले खरीदारी की योजना बना रहे थे। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के दिसंबर एक्सपायरी कॉन्ट्रैक्ट में 2.11% की कमी के साथ भाव 1,18,410 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। चांदी के मामले में भी स्थिति समान है, जहां भाव 1,51,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास स्थिर हुए।

यह गिरावट अचानक नहीं है। पिछले आठ दिनों में सोने की कीमत कुल 11,541 रुपये प्रति 10 ग्राम लुढ़क चुकी है, जो लगभग 10% की कमी का संकेत देती है। चांदी की स्थिति और भी गंभीर है, जहां आठ दिनों में 27,334 रुपये प्रति किलोग्राम की कुल गिरावट देखी गई। यह आंकड़ा निवेशकों को झकझोर रहा है, क्योंकि 2025 की शुरुआत में सोना 50% से अधिक चढ़ चुका था, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं और सेंट्रल बैंक खरीदारी के दम पर। लेकिन अब बाजार की हवा बदल गई है। आइए, इस गिरावट के पीछे की तीन प्रमुख वजहों पर गहराई से नजर डालें, जो वैश्विक आर्थिक संकेतों से जुड़ी हैं।

पहली वजह: मजबूत अमेरिकी डॉलर का दबाव

सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती। डॉलर इंडेक्स हाल के दिनों में 106 के स्तर को पार कर चुका है, जो 2025 के अधिकांश समय से ऊंचा है। डॉलर मजबूत होने पर सोना और चांदी जैसी डॉलर-मूल्यित संपत्तियां महंगी हो जाती हैं, जिससे उभरते बाजारों जैसे भारत में मांग कम हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति ने इस मजबूती को बढ़ावा दिया है। फेड ने हाल ही में ब्याज दरों में कटौती की संभावना को टाल दिया है, जिससे निवेशक सुरक्षित संपत्तियों से दूर हो रहे हैं।

भारतीय रुपये की डॉलर के मुकाबले 0.5% की कमजोरी ने भी घरेलू कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाला। एमसीएक्स पर सोने के भाव में 4.92% की एकदिनी गिरावट इसी का नतीजा थी। यदि डॉलर इंडेक्स 108 तक पहुंचा, तो सोने की कीमतें और 5% लुढ़क सकती हैं, जैसा कि विश्लेषकों ने चेतावनी दी है।

दूसरी वजह: रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद प्रॉफिट बुकिंग

2025 में सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था, जहां प्रति 10 ग्राम भाव 1.30 लाख रुपये को छू लिया था। लेकिन अब निवेशक प्रॉफिट बुकिंग में जुटे हैं। पिछले महीने की तेज चढ़ान के बाद, ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशनें समेटनी शुरू कर दीं, जिससे बिकवाली का सैलाब आ गया। सिल्वर के मामले में यह और स्पष्ट है, जहां कीमतें रिकॉर्ड हाई से 17% नीचे आ चुकी हैं।

विश्लेषक धवन ने कहा, "ब्रॉडर एसेट एलोकेशन स्टोरी बरकरार है, लेकिन शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट टेकिंग ने बाजार को दबोच लिया।" यह ट्रेंड वैश्विक स्तर पर दिख रहा है, जहां गोल्ड फ्यूचर्स 5.2% गिरकर 4,130 डॉलर प्रति औंस पर आ गए। भारत में यह गिरावट दिवाली की खरीदारी को प्रभावित कर रही है, जहां उपभोक्ता अब सस्ते दामों का इंतजार कर रहे हैं।

तीसरी वजह: यूएस-चीन व्यापार सौदे की आशावादी खबरें

तीसरी अहम वजह है यूएस-चीन व्यापार वार्ताओं में प्रगति। हाल ही में वाशिंगटन और बीजिंग के बीच हुए समझौते ने वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंकाओं को कम किया है। इससे सुरक्षित हेवन एसेट्स जैसे सोना-चांदी की मांग घट गई, क्योंकि निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों जैसे स्टॉक्स की ओर लौट रहे हैं। लिवमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, "ट्रेड डील की संभावना से सेफ-हेवन डिमांड कमजोर हुई।"

यह खबर मध्य पूर्व में तनाव कम होने के साथ मिलकर बाजार को और नीचे धकेल रही है। सितंबर में गोल्ड 7% और सिल्वर 10% से अधिक गिर चुके थे, और अक्टूबर का अंत इसी ट्रेंड पर हो रहा है।

शहरवार कीमतें

भारतीय शहरों में सोने-चांदी की कीमतें क्षेत्रीय प्रीमियम के कारण थोड़ी भिन्न हैं। नीचे दी गई तालिका आज की औसत दरें दर्शाती है (प्रति 10 ग्राम सोना, प्रति किग्रा चांदी):

शहर24 कैरेट सोना (₹)चांदी (₹)
दिल्ली1,18,5001,51,200
मुंबई1,18,3001,51,000
कोलकाता1,18,4001,51,100
चेन्नई1,18,6001,51,300
बैंगलोर1,18,4501,51,150

विशेषज्ञों की सलाह: खरीदें या इंतजार करें?

इस गिरावट के बीच विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं। इंडिया टुडे के अनुसार, "अभी डिप पर खरीदारी का अच्छा मौका है, लेकिन लॉन्ग-टर्म होल्डर्स को इंतजार करना चाहिए।" इकोनॉमिक टाइम्स के एक्सपर्ट्स का मानना है कि फेड की अगली मीटिंग (नवंबर 2025) के बाद रिकवरी हो सकती है, जब ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें बढ़ेंगी। सिल्वर के लिए, 2026 तक 2 लाख रुपये के लक्ष्य की भविष्यवाणी की जा रही है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में अस्थिरता बनी रहेगी।

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