मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित भगवान विष्णु को समर्पित एक मंदिर जिसकी दिव्यता और भव्यता दोनों ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यह मंदिर आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालू भगवान व्यंकटेश के दर्शन के लिए आते हैं.
आपको बता दें सतना में स्थित वेंकटेश मंदिर का निर्माण देवराजनगर के शाही परिवार के महाराज रंदमान सिंह ने 1876 से 1925 के बीच कराया था। मंदिर के निर्माण के लिए कुशल कारीगरों को दक्षिण भारत से बुलाया गया था। मंदिर में की गई शिल्पकला और नक्काशी से मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। जहां मंदिर का आंतरिक स्वरूप अद्भुत कारीगरी का नमूना पेश करता है तो वहीं मंदिर के बाहरी आवरण को लाल पत्थर में अद्भुत कलाकृतियों से सजाया गया है। मंदिर के निर्माण में लाल पत्थरों का उपयोग किया है, जिसकी वजह से बाहर से देखने पर यह मंदिर बहुत ही सुंदर दिखाई देता है। वहीं मंदिर को अंदर से देखने पर भी बाहर की तरह ही यह विशाल प्रतीत होता है। मंदिर के अंदर बड़ी बड़ी गैलरी और खंभे स्थित हैं और सैकड़ों वर्ष बीत जाने पर भी मजबूती से खड़े हैं। जो लोगों को अचंभित करते हैं।
मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर के अंदर बहुत ही सुंदर कलाकृतियां की गई हैं। मंदिर के अंदर पर्याप्त स्थान की वजह से लोगों की विशाल भीड़ होने पर भी गर्भगृह की परिक्रमा करने पर कोई परेशानी नहीं होती। मंदिर में विराजमान व्यंकटेश भगवान की मूर्ति अष्टधातु की है, जिसे जयपुर के कुशल कारीगरों ने बनाया था। मंदिर में प्रकाश के लिए खंभों पर दीपक जलाने के लिए विशेष आकृति बनाई गई है। मंदिर में गरूण भगवान की प्रतिमा है, जिनकी भक्त रोजाना पूजा करते हैं। मंदिर में कई धार्मिक आयोजन किए जाते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से झूलन महोत्सव, जन्माष्टमी, नरसिंह चतुर्दशी, गुरू पूर्णिमा, रामनवमी व शरद पूर्णिमा शामिल हैं।
मंदिर परिसर के 10 एकड़ में फैला व्यंकटेश उद्यान यहां आने वाले सैलानियों के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। मंदिर में हाल ही में सौंदर्यीकरण का काम किया गया, जिसमें महाकाल लोक की तरह व्यंकटेश लोक का निर्माण कराया गया। मंदिर परिसर में भगवान विष्णु के दस अवतारों भगवान मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि भगवान की सुंदर प्रतिमा बनाई गई हैं। आइए अब जानते हैं भगवान विष्णु के दशवतारों के बारे में छोटी सी जानकारी।
भगवान मत्स्य:
विष्णु के पहले अवतार हैं, जिन्होंने प्रलय के समय में मछली के रूप में प्रकट हुआ और संसार को बचाकर धर्म की रक्षा की.
भगवान कूर्म:
विष्णु के दूसरे अवतार, जो कछुए के रूप में प्रकट हुए और समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया.
भगवान वराह:
विष्णु के तीसरे अवतार, जिन्होंने पृथ्वी को समुद्र से निकालकर धर्म की स्थापना की.
भगवान नरसिंह:
विष्णु के चौथे अवतार, जिन्होंने नरसिंह के रूप में प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप नामक दैत्य का वध किया.
भगवान वामन:
विष्णु के पांचवें अवतार, जो वामन के रूप में प्रकट हुए और दानव राजा बलि से भूमि दान प्राप्त की.
भगवान परशुराम:
विष्णु का छठे अवतार, जो ब्राह्मण के रूप में प्रकट हुए और क्षत्रियों के अत्याचार का अंत किया.
भगवान राम:
विष्णु के सातवें अवतार, जो राजा दशरथ के पुत्र के रूप में प्रकट हुए और रावण का वध करके धर्म की स्थापना की.
भगवान कृष्ण:
विष्णु के आठवें अवतार, जो द्वापर युग में प्रकट हुए और महाभारत के धर्मयुद्ध में धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
भगवान बुद्ध:
विष्णु का नौवें अवतार, जो गौतम बुद्ध के रूप में प्रकट हुए और बौद्ध धर्म की स्थापना की.
भगवान कल्कि:
विष्णु के दसवें अवतार, जो कलयुग के अंत में प्रकट होगा और धर्म की स्थापना करेंगे।
अब बात करते हैं, मंदिर की। मंदिर में स्थित वेंकटेश लोक में एक तालाब है जिसके ठीक बीच भगवान विष्णु की एक भव्य प्रतिमा भी बनाई गई है। जो लोगों को बहुत आकर्षित करती है। वेंकटेश लोक में आकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। यहां की सुंदरता आपको यहां आने पर विवश कर देगी। रात में मंदिर में रंगबिरंगी लाइटों की सजावट मंदिर का दृश्य और भी मनमोहक बना देती है।



