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न जंग खत्म, न भरोसा कायम, अमेरिका-ईरान डील पर क्यों उठ रहे बड़े सवाल?

न जंग खत्म, न भरोसा कायम, अमेरिका-ईरान डील पर क्यों उठ रहे बड़े सवाल?

पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच एक संभावित अंतरिम समझौते की चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहे संकट को नियंत्रित करना है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर जोर दिया जा रहा है, जो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

ईरान चाहता है आर्थिक राहत

संघर्ष और प्रतिबंधों का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। बढ़ती महंगाई, विदेशी मुद्रा की कमी और आर्थिक दबाव के कारण ईरान राहत की उम्मीद कर रहा है। चर्चा है कि संभावित समझौते के तहत कुछ प्रतिबंधों में ढील और रोकी गई आर्थिक संपत्तियों को जारी करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। हालांकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताओं पर बड़े समझौते के संकेत नहीं दे रहा है।

ट्रंप पर भी राजनीतिक दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भी राजनीतिक चुनौती है। आने वाले चुनावों से पहले वह किसी बड़ी कूटनीतिक सफलता को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहते हैं। ऐसे में ईरान के साथ किसी तरह का समझौता उनके लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका चाहता है कि परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम के मुद्दे पर उसे स्पष्ट सफलता दिखाई दे।

सबसे बड़ी बाधा बनी पुरानी मांगें

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों की मूल मांगों में अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, जबकि अमेरिका सुरक्षा गारंटी देने के पक्ष में नहीं दिख रहा। दूसरी ओर इजरायल भी ईरान को अपने लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा मानता है और उसकी क्षेत्रीय भूमिका को सीमित करना चाहता है।

विवादित मुद्दे बाद के लिए टल सकते हैं

कई जानकारों का मानना है कि यदि समझौता होता भी है तो उसमें केवल तत्काल तनाव कम करने वाले बिंदुओं पर सहमति बनेगी। परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव जैसे बड़े और विवादित मुद्दों को भविष्य की बातचीत के लिए छोड़ा जा सकता है। इसलिए इस समझौते को अंतिम समाधान नहीं माना जा रहा है।

शांति नहीं, सिर्फ विराम?

विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने और आर्थिक राहत मिलने से वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है। लेकिन अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जो गहरे मतभेद हैं, वे अभी भी कायम रहेंगे। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ इस संभावित समझौते को शांति समझौते के बजाय जंग में एक अस्थायी विराम मान रहे हैं। यानी संघर्ष भले कुछ समय के लिए थम जाए, लेकिन क्षेत्र में स्थायी शांति की राह अभी भी लंबी और चुनौतीपूर्ण नजर आती है।

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