आगरा में बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा साइबर ठगी का शिकार हो गए। एक जून को उन्हें एक अनजान कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को पार्सल भेजने वाला व्यक्ति बताया और कहा कि डिलीवरी के लिए लोकेशन अपडेट करनी है। इसके बाद उसने एक विशेष नंबर डायल करने को कहा। जल्दबाजी में नंबर डायल करते ही उनका मोबाइल साइबर अपराधियों के निशाने पर आ गया। कुछ ही देर में उनका व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर लिया गया।
गृहमंत्री और पीएमओ तक पहुंचे मैसेज
मोबाइल हैक होने के बाद अपराधियों ने उनके संपर्कों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि गृहमंत्री, पीएमओ, हरियाणा के मुख्यमंत्री समेत करीब 6000 लोगों को पैसे मांगने वाले संदेश भेजे गए। ठगों ने खुद को दिनेश चंद्र शर्मा बताकर मदद के नाम पर रुपये मांगे। कई लोगों को क्यूआर कोड भी भेजे गए ताकि सीधे पैसे ट्रांसफर कराए जा सकें।
कुछ लोगों ने भेज भी दिए पैसे
मामले की जानकारी तब हुई जब गुजरात के एक व्यक्ति ने फोन कर पूछा कि आखिर रुपये क्यों मांगे जा रहे हैं। इसके बाद दिनेश चंद्र शर्मा को पूरे मामले का पता चला। जांच में सामने आया कि कई लोगों ने ठगों की बातों पर भरोसा कर रुपये भी भेज दिए। शुरुआती जानकारी के अनुसार दो लाख रुपये से ज्यादा का लेनदेन हो चुका है। लोगों ने भुगतान के स्क्रीनशॉट भी साझा किए हैं।
बिहार और जयपुर से जुड़े सुराग
पुलिस जांच में पता चला है कि जिस कॉल के जरिए जाल बिछाया गया, उसकी लोकेशन बिहार के मैसी क्षेत्र की मिली है। वहीं जिस नंबर का इस्तेमाल किया गया, वह जयपुर से जुड़ा पाया गया। पुलिस अब कॉल रिकॉर्ड, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। साइबर सेल को पूरे मामले की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वीआईपी संपर्कों को लेकर बढ़ी चिंता
इस मामले में सबसे बड़ी चिंता यह है कि हैकर्स के पास अब कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील नंबर पहुंच चुके हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इन संपर्कों का आगे किसी बड़े साइबर अपराध या फर्जीवाड़े में इस्तेमाल न किया जाए। गृह मंत्रालय की ओर से भी मामले को गंभीरता से लिया गया है और स्थानीय पुलिस को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी नई-नई तरकीबों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। किसी भी अनजान कॉल पर बताए गए नंबर या कोड को डायल करने से पहले पूरी जांच करना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल पर आने वाले संदिग्ध निर्देशों का पालन न करें और किसी भी असामान्य गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें।
