उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान एटीएस और पुलिस की जांच में एक खतरनाक पैटर्न सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार विदेशी फंडिंग सोशल मीडिया और हनीट्रैप जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर पहले लोगों का ब्रेनवॉश किया गया और फिर उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश की गई। कई मामलों में आरोप है कि धर्मांतरण के बाद युवाओं का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क में किया जाने लगा। इन खुलासों के बाद सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा सतर्क हो गई हैं।
हालिया मामलों से खुलासा
हाल ही में पकड़े गए दो अलग अलग मॉड्यूल को इस नए पैटर्न की बड़ी मिसाल माना जा रहा है। जांच में सामने आया कि कुछ आरोपी विदेशी संगठनों और पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे। आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को प्रभावित किया गया और उन्हें कट्टर विचारधारा से जोड़ने की कोशिश हुई। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इन मामलों में कई बार हिंदू नाम वाले युवाओं को भी नेटवर्क का चेहरा बनाकर इस्तेमाल किया गया ताकि शक कम हो सके।
2021 का बड़ा मामला
साल 2021 में उत्तर प्रदेश में बड़े धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा हुआ था जब एटीएस ने उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क पर विदेशी फंडिंग के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और विशेष जरूरत वाले छात्रों को लालच देकर धर्मांतरण कराने के आरोप लगे थे। इसी मामले में बाद में मौलाना कलीम सिद्दीकी की गिरफ्तारी भी हुई थी। एजेंसियों का दावा है कि कई ट्रस्ट और संस्थाओं के जरिए यह नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
नए नेटवर्क पर नजर
2025 में बलरामपुर और आगरा से सामने आए मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी। जांच में सोशल मीडिया पर हथियारों वाली तस्वीरें विदेशी फंडिंग और कट्टरपंथी गतिविधियों के संकेत मिलने का दावा किया गया। आरोप है कि कुछ लोग धर्मांतरण के बाद नए युवाओं को अपने जाल में फंसाने का काम कर रहे थे। जांच एजेंसियां अब इन मामलों के बीच संभावित कनेक्शन तलाशने में जुटी हुई हैं ताकि पूरे नेटवर्क की पहचान की जा सके।
कैसे काम करता है नेटवर्क
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क कई चरणों में काम करता है। पहले सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भावनात्मक संपर्क बनाया जाता है। इसके बाद आर्थिक मदद नौकरी या विदेश में बसाने जैसे लालच दिए जाते हैं। फिर धीरे धीरे कट्टर विचारधारा फैलाने की कोशिश की जाती है। टेलिग्राम सिग्नल और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल संपर्क बनाए रखने के लिए किया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यही तरीका आगे चलकर गंभीर साजिशों की जमीन तैयार करता है।
एटीएस की कार्रवाई जारी
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस तरह के नेटवर्क पर लगातार नजर रखी जा रही है और कई संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है। जांच में सामने आए नामों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। एटीएस अधिकारियों के मुताबिक सोशल मीडिया और विदेशी फंडिंग के जरिए युवाओं को प्रभावित करने की कोशिशों को रोकना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इसी वजह से एजेंसियां लगातार डिजिटल प्लेटफॉर्म और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा रही हैं।
