अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिसके बाद भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले सामानों पर कुल टैरिफ 50% हो गया है। यह कार्यकारी आदेश 6 अगस्त 2025 को साइन किया गया और यह 27 अगस्त 2025 से प्रभावी होगा।
आपको बता दें इस कदम का मुख्य कारण भारत द्वारा रूस से तेल की निरंतर खरीद को बताया गया है, जिसे ट्रम्प प्रशासन ने रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस को आर्थिक समर्थन देने के रूप में देखा है। ट्रम्प ने अपने कार्यकारी आदेश में कहा कि भारत सरकार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल आयात कर रही है, जो अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए खतरा है।
ट्रम्प ने आगे कहा यह आदेश 2022 में घोषित राष्ट्रीय आपातकाल (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14066) पर आधारित है, जिसमें रूस के यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई के जवाब में रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाया गया था। ट्रम्प ने दावा किया कि भारत की यह नीति रूस को आर्थिक लाभ पहुंचा रही है, जिसके चलते यह टैरिफ लागू किया गया है। इसके अलावा, ट्रम्प ने भारत पर उच्च टैरिफ लगाने की बात को भी दोहराया, उनका कहना है कि भारत अमेरिकी सामानों पर "दुनिया में सबसे अधिक" टैरिफ लगाता है। उन्होंने इसे व्यापार असंतुलन को ठीक करने और अमेरिकी आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया।
अन्य देशों पर टैरिफ
ट्रम्प ने 70 से अधिक देशों पर 10% से 41% तक के टैरिफ लगाए हैं।
- ब्राजील: 50%
- चीन: 60% (जून 2025 में बढ़ाया गया)
- पाकिस्तान: 19%
- वियतनाम और बांग्लादेश: 20%
- स्विट्जरलैंड: 39%
- सीरिया: 41%
भारत पर टैरिफ का असर क्या होगा?
इस नए टैरिफ से भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्र प्रभावित होंगे, भारत से अमेरिका को 9 अरब डॉलर से अधिक की ज्वेलरी निर्यात होती है। टैरिफ से इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे मांग कम हो सकती है और भारतीय ज्वेलरी उद्योग पर असर पड़ सकता है। अमेरिका भारत से कपड़े और जूतों का बड़ा आयातक है। 50% टैरिफ से इन उत्पादों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर छोटे और मध्यम उद्यमों पर पड़ सकता है। भारत से 14 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद अमेरिका को निर्यात होते हैं। हालांकि, वर्तमान में ये ड्यूटी-फ्री हैं, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस के सीईओ अजय सहाय ने कहा कि 50% टैरिफ से भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से छोटे उद्योगों, को भारी नुकसान होगा।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को "अनुचित, अन्यायपूर्ण और अतार्किक" बताया है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत का तेल आयात बाजार की परिस्थितियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंत्रालय ने यह भी जोड़ा कि कई अन्य देश भी अपने राष्ट्रीय हितों में रूस से व्यापार कर रहे हैं, फिर भी भारत को निशाना बनाया जा रहा है। भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने की बात कही है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में कहा कि सरकार राष्ट्रहित में सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस पार्टी ने इस टैरिफ को "आर्थिक ब्लैकमेल" करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चिंता जताई कि 50% टैरिफ से भारतीय निर्यात पर गंभीर असर पड़ेगा और अमेरिकी उपभोक्ता कम टैरिफ वाले देशों जैसे वियतनाम, बांग्लादेश और पाकिस्तान की ओर रुख कर सकते हैं। थरूर ने अमेरिका पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया, क्योंकि अमेरिका स्वयं रूस से यूरेनियम और पैलेडियम आयात करता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे "अमेरिकी दादागिरी" बताया और पीएम मोदी से मजबूत रुख अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह कदम छोटे उद्योगों और निर्यात पर गहरा असर डालेगा।
भारत के पास अब कौन से विकल्प
भारत के पास 21 दिन का समय है (27 अगस्त तक) जिसमें वह अमेरिका के साथ बातचीत कर टैरिफ में छूट या संशोधन की मांग कर सकता है। कार्यकारी आदेश की धारा 4(c) के अनुसार, रूसी तेल आयात कम करने पर टैरिफ में रियायत संभव है।
भारत अपनी 85% तेल आवश्यकताओं का आयात करता है, जिसमें से 40% रूस से आता है। भारत सऊदी अरब, यूएई, इराक या नाइजीरिया जैसे देशों से आयात बढ़ा सकता है, हालांकि इससे लागत बढ़ सकती है। यदि बातचीत विफल होती है, तो भारत अमेरिकी उत्पादों जैसे कृषि उत्पादों, दवाओं और तकनीकी उपकरणों पर जवाबी टैरिफ लगा सकता है, जैसा कि 2019 में किया गया था। भारत सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों और घरेलू तेल-गैस उत्पादन को बढ़ावा दे सकता है।



