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UP के फतेहपुर में 'मकबरा या मंदिर', क्या है दोनों पक्षों के दावा?

UP के फतेहपुर में 'मकबरा या मंदिर', क्या है दोनों पक्षों के दावा?

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के आबूनगर रेडइया इलाके में स्थित नवाब अब्दुल समद के मकबरे को लेकर 11 अगस्त 2025 को एक बड़ा विवाद सामने आया। इस विवाद ने न केवल साम्प्रदायिक तनाव को जन्म दिया, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गया।

आपको बता दें इस विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने बीजेपी पर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने विवादास्पद बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर हिंदू की जगह मुस्लिम समुदाय के लोग होते तो पुलिस गोली मार देती। उन्होंने नफरत फैलाने के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर राजनीति न करने और शांति बनाए रखने की अपील की। बीएसपी प्रमुख मायावती ने सरकार से कड़ा रुख अपनाने और साम्प्रदायिक सौहार्द सुनिश्चित करने की मांग की।

क्या है पूरा मामला?

हिंदू संगठनों का दावा है कि यह मकबरा वास्तव में भगवान शिव और श्री कृष्ण का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे 500 साल पुराना मकबरा बताता है। इस लेख में हम इस घटना के विभिन्न पहलुओं, दावों, प्रतिदावों, और प्रशासनिक कार्रवाइयों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे। यह विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू संगठनों, जिनमें बजरंग दल और मठ-मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति शामिल हैंევ, ने दावा किया कि आबूनガー रेडइया में स्थित नवाब अब्दुल समद का मकबरा वास्तव में एक प्राचीन ठाकुर जी का मंदिर है। उनका कहना था कि मकबरे में त्रिशूल और कमल के प्रतीक मौजूद हैं, जो मंदिर की पहचान को दर्शाते हैं।

हिंदू संगठनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर 11 अगस्त को मकबरे में पूजा-अर्चना करने का ऐलान किया। इसके जवाब में प्रशासन ने मकबरे के आसपास बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल तैनात किया। हालांकि, सोमवार सुबह सैकड़ों की संख्या में हिंदूवादी संगठनों के लोग, जिनका नेतृत्व फतेहपुर के बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल कर रहे थे,

11 अगस्त 2025 को सुबह करीब 10 बजे, हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मकबरे पर पहुंचकर भग Terehpur News: भगवा झंडा फहराया और तोड़फोड़ शुरू की। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद पथराव शुरू हो गया। पुलिस और पीएसी ने अतिरिक्त बल का उपयोग कर स्थिति को नियंत्रित किया। घटना के दौरान, भीड़ ने मकबरे के अंदर और बाहर तोड़फोड़ की और मजार को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसने साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा दिया। पुलिस ने 10 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया, जिसमें जिला पंचायत सदस्य और सभासद शामिल हैं।

दोनों पक्षों के दावे

हिंदू संगठनों का दावा

हिंदू संगठनों का कहना है कि मकबरा वास्तव में एक प्राचीन मंदिर है, जिसे मस्जिद में बदल दिया गया। उनके अनुसार, ढांचे में त्रिशूल और कमल जैसे प्रतीक हैं, जो हिंदू मंदिरों की पहचान हैं। उन्होंने मकबरे में पूजा करने की मांग की और इसे मंदिर के रूप में बहाल करने की बात कही।

मुस्लिम समुदाय का दावा

मकबरे के केयरटेकर मोहम्मद नफीस ने दावा किया कि यह इमारत लगभग 500 साल पुरानी है और इसे मुगल बादशाह अकबर के पोते ने बनवाया था। इसमें अबू मोहम्मद और अबू समद की कब्रें हैं। राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने भी इसे मकबरा बताते हुए इसके ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने की मांग की।

फतेहपुर गजेटियर (1906) के अनुसार, यह ढांचा नवाब अब्दुल समद खान बहादुर, औरंगजेब के समय के पाइलानी के फौजदार, का मकबरा है। सरकारी रिकॉर्ड में यह खसरा संख्या 753 के तहत राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में दर्ज है। हालांकि, हिंदू संगठनों का दावा है कि यह ढांचा 1,000 साल से अधिक पुराना है और इसे मंदिर से मकबरे में बदला गया। इस दावे ने विवाद को और जटिल बना दिया है।

पुलिस प्रशासन की कार्रवाई

पुलिस ने इस घटना को अति संवेदनशील मानते हुए त्वरित कार्रवाई की। 10 नामजद व्यक्तियों, जिनमें जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह, सभासद ऋतिक पाल, विनय तिवारी, पुष्पराज पटेल, और अन्य शामिल हैं, और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की हैं और अज्ञात आरोपियों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की है। जिला प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस और पीएसी बल तैनात कर दिया है। मकबरे के 100 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग की गई है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

फतेहपुर के मुस्लिम समुदाय ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया। स्थानीय निवासी तसलीम तारीफ अशरफी ने बताया कि भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में तोड़फोड़ की और प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मकबरे के निर्माण के समय के दस्तावेज मौजूद हैं, जो इसे नवाब का मकबरा साबित करते हैं। फिलहाल, फतेहपुर में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। पुलिस और पीएसी की भारी तैनाती के साथ, मकबरे और आसपास के क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है, और मामले की जांच जारी है।

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