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118 करोड़ मे बिकी यें पेंटिंग, चित्र भी विचित्र, आखिर क्या है इसकी खास बात

118 करोड़ मे बिकी यें पेंटिंग, चित्र भी विचित्र, आखिर क्या है इसकी खास बात

भारतीय चित्रकार एमएफ हुसैन की एक पेंटिंग ने नीलामी में इतिहास रच दिया है। उनकी 'अनटाइटल्ड (ग्राम यात्रा)' नाम की पेंटिंग 1.38 करोड़ डॉलर (लगभग 118 करोड़ रुपये) में बिकी है। न्यूयॉर्क में क्रिस्टीज में हुई इस नीलामी के बाद एक अज्ञात संस्था ने इसे खरीदा।

एमएफ हुसैन की इस पेटिंग ने आधुनिक भारतीय कला की सबसे महंगी पेटिंग का रिकॉर्ड बनाया है। यह किसी भी आधुनिक भारतीय कलाकृति के लिए अब तक की सबसे ऊंची नीलामी कीमत है। इस पेंटिंग को प्रसिद्ध चित्रकार के 1950 के दशक की सबसे अहम और विशाल पेटिंग माना जाता है। न्यूयॉर्क में क्रिस्टीज में हुई इस नीलामी के बाद एक अज्ञात संस्था ने इसे खरीदा।

क्या है इस पेटिंग में खास 

118 करोड़ रुपये में बिकी इस पेटिंग को साल 1954 में बनाया गया था. यह पेंटिंग 70 सालों बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से नीलाम हुई। इस नीलामी ने अमृता शेरगिल के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इस पेंटिंग की लम्बाई 14 फीट है और इस चित्रकारी में 13 अलग-अलग भारतीय गांवों के दृश्यों को दिखाया गया है. पेंटिंग में एक पुरुष और महिला बैलगाड़ी पर सवार दिखाए गए हैं, जो भारतीय कृषि की सुंदरता और महत्ता का प्रतीक है.

इसके अलावा, महिलाएं गाय का दूध निकालती, अनाज पीसती और अपने बच्चों की देखभाल करती नजर आती हैं, जो उर्वरता, सृजन, और पुनर्जन्म के प्रतीक हैं. एक खास दृश्य में किसान को जमीन उठाते हुए दिखाया गया है, जो भारत के ग्रामीण समाज की अहमियत को प्रतीकात्मक रूप से उजागर करता है. यह पेटिंग मूल रूप से नॉर्वे के जनरल सर्जन और निजी कला संग्राहालय लियोन एलियास वोलोडार्स्की ने खरीदी थी, बाद में उन्होंने इसे ओस्लो यूनिवर्सिटी ङॉस्पिटल को दान कर दी. अब इस पेटिंग को किरण नादर ने खरीदी है.  

एमएफ हुसैन का जन्म 17 सितंबर 1915 में महाराष्ट्र के पंढरपुर में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी पेंटिंग की शानदार कला के जरिए लोगों के दिलों में एक अलग ही पहचान बनाई। हुसैन एक फोटोग्राफर और फिल्म निर्माता भी थे। उन्होंने अपनी कलाकृतियों के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीते है, जिसमें  पद्मश्री, पद्मविभूषण, पद्मभूषण जैसे अवॉर्ड शामिल है। एक समय था जब राजनीति को लेकर देवी-देवताओं की उनकी पेंटिंग पर जमकर विवाद भी हुआ। इसके बाद उन्होंने भारत छोड़ दिया और दुबई के एक शहर में रहने लगे। नौ जून 2011 को 95 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई थी।

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