हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस पवित्र महीने में पड़ने वाले सभी सोमवार को विशेष महत्व प्राप्त है, क्योंकि सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। सावन 2025 का आखिरी सोमवार 4 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन कई शुभ योग जैसे सर्वार्थ सिद्धि योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग बन रहे हैं, जो इसे और भी विशेष बनाते हैं।
पंचांग के अनुसार, सावन 2025 का महीना 11 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त को समाप्त होगा। इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, और आखिरी सोमवार 4 अगस्त 2025 को होगा। इस दिन भक्त शिवलिंग का अभिषेक और पूजा-अर्चना कर भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:20 से 05:02 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक।
- अमृत काल: शाम 05:47 बजे से 07:34 बजे तक।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 05:44 बजे से 09:12 बजे तक।
- रवि योग: पूरे दिन।
इस दिन चंद्रमा अनुराधा और चित्रा नक्षत्र के साथ वृश्चिक राशि में गोचर करेगा, जो पूजा के लिए शुभ माना जाता है। भक्त पूरे दिन किसी भी समय पूजा कर सकते हैं, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना सबसे फलदायी माना जाता है।
सावन सोमवार पूजा विधि
सावन के आखिरी सोमवार को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। अब आपको बतातें है सावन सोमवार पूजा विधि... ब्रह्म मुहूर्त में सुबह जल्दी उठें और स्नान करें। स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र (विशेष रूप से पीले या सफेद) धारण करें। पूजा शुरू करने से पहले व्रत और शिव पूजा का संकल्प लें। संकल्प में भगवान शिव से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और पापों की क्षमा की प्रार्थना करें। घर पर या मंदिर में एक चौकी पर स्वच्छ लाल या सफेद वस्त्र बिछाएं। चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, चंदन, अक्षत, फल, मिठाई और धूप-दीप अर्पित करें। फिर शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें। अभिषेक के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें। आपको बता दें रुद्राभिषेक करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और ग्रह दोषों को शांत करता है।
मंत्र जाप और पाठ
- 'ॐ नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का 108 बार जाप करें।
- शिव चालीसा, रुद्राष्टक, या सावन सोमवार व्रत कथा का पाठ करें।
आरती और क्षमा प्रार्थना
- पूजा के अंत में शिव आरती करें और घी का दीपक जलाएं।
- पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए भगवान शिव से क्षमा मांगें।
व्रत और दान
- पूरे दिन फलाहार या सात्विक भोजन करें। निर्जल व्रत रखने वाले अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, या दक्षिणा दान करें।
सावन में क्या न करें
- शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी, या सिंदूर न चढ़ाएं, क्योंकि ये भगवान शिव को प्रिय नहीं हैं।
- पूजा के दौरान सिर को ढककर रखें।
- मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें और पूरे दिन संयमित रहें।
- मांस, मदिरा, और तामसिक भोजन से परहेज करें।
सावन के आखिरी सोमवार का महत्व
सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। मान्यता है कि इस महीने में शिवलिंग पर जल, पंचामृत और बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आखिरी सावन सोमवार को विशेष शुभ योगों का संयोग होने के कारण यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दिन पूजा करने से सुख-समृद्धि, जीवन में धन-धान्य और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। वैवाहिक जीवन मे दांपत्य जीवन में खुशहाली और प्रेम बढ़ता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से रोग और कष्ट दूर होते हैं। भक्ति से कर्म बंधन मिटते हैं और आत्मा का शुद्धिकरण होता है। इसके अलावा, सावन के आखिरी सोमवार को कांवड़ यात्रा का समापन भी होता है, जिसमें भक्त गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यह दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का अंतिम अवसर होता है।



