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गिरिराज और कृष्ण में कोई भेद नहीं-कथा व्यास

गिरिराज और कृष्ण में कोई भेद नहीं-कथा व्यास

न्यूज प्लस डेस्क, कानपुर। श्री बांकेबिहारी जी परिवार सिमित कानपुर के तत्वावधान में 8 फरवरी से चल रही श्रीमाद्भागवत कथा के 5वें दिन कथा व्यास भगवताचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने कहा की जहां स्वार्थ समाप्त होता है, मानवता वहीं से प्रारम्भ होती है। मानव योनि में जन्म लेने मात्र से जीव को मानवता प्राप्त नहीं होती। यिद मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद भी उसमें स्वार्थ की भावना भरी रहती है, तो वह मानव होते हुए भी राक्षसीवृत्ति के पायदान पर खड़ा रहता है।

 कथा व्यास ने कहाकियदि स्वार्थ की भावना को त्याग कर हमेशा परमार्थभाव से जीवन यापन करें तो निश्चित रूप से वह एक अछा इंसान है, यानी सुदृढ़ मानवता की श्रेणी में खड़ा होकर परसेवा कार्य में रत है। क्योंकि परमार्थ की भावना ही व्यक्ति को महान बनाती है।

श्रीकृष्ण की लीलाओं में पूतना चरित्र पर व्यायान देते हुए आचार्य गोस्वामी श्री मृदुल कृष्ण महाराज ने कहा कि कंस ने स्वयं को सब कुछ समझ लिया। हमसे बड़ा कोई न हो, जो हमसे बड़ा बनना चाहे या हमारा विरोधी हो उसको मार दिया जाय। ऐसा निष्चय कर ब्रज क्षेत्र में जितने बालक पैदा हुए हों उनको मार डालो, और इसके लिए पूतना राक्षसी को भेजा तो प्रभु श्रीबालकृष्ण भगवान ने पूतना को मोक्ष प्रदान किया ही, इधर कंस प्रतापी राजा उग्रसेन का पुत्र होते हुए भी स्वावार्थलुपता अधिकाधिक होने के कारण राक्षस की श्रेणी मे आ गया और भगवान श्री कृष्ण ने उसका संहार किया।

विशेष महोत्सव के रूप में आज श्री गिरिराज पूजन (छप्पन भोग महोत्सव) विशेष धूम-धाम से मनाया गया। कल की कथा में विशेष महोसव के रूप में रुक्मिणि विवाह महोत्सव अतिहर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। आयोजन मे संजय गुता, पंकज बंका, राम किशन अग्रवाल, विनोद मुरारका, अनुपम अग्रवाल, राज गुता, रामचंद्र गुता, सुरेश गुप्ता, दीप सक्सेना, अंशुल गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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