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एक कांवड़ ऐसी भी... डॉक्‍टर बना भगवान ! जाने पूरा मामला

एक कांवड़ ऐसी भी... डॉक्‍टर बना भगवान ! जाने पूरा मामला

सावन का पवित्र महीना चल रहा है, हिंदू धर्म में इस महीने का खास महत्व है क्योकि इस लिए भी ये महीना भगवान शिव को समर्पित है, 11 जुलाई से लाखों कांवड़ियो हर-हर, बम-बम बोले के जयकारों के साथ आगे की ओर बढ़ रहे है, देशभर भर के शिवालयों मे भी भक्तों का जनसैलाब देखने को मिल रहै है, इसी बीच उत्तर प्रदेश के बागपत एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुन सभी हैरन रह गए है।

बागपत जिले के बड़ौत कस्बे में एक अनोखी और भावुक करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पिता ने अपनी नवजात बेटी की जान बचाने वाले डॉक्टर को भगवान मान लिया। आपको बता दें यह कहानी न केवल श्रद्धा और विश्वास की है, बल्कि एक डॉक्टर के सम्मान की भी मिसाल है।

क्या है मामला?

बड़ौत निवासी विशाल भारद्वाज की नवजात बेटी समय से पहले (प्रीमैच्योर) पैदा हुई थी। जन्म के समय उसकी हालत इतनी नाजुक थी कि कई डॉक्टरों ने उसके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। परिवार ने कई अस्पतालों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कई डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया। इस मुश्किल घड़ी में एक निजी अस्पताल में कार्यरत डॉ. अभिनव तोमर ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने नन्हीं बच्ची का इलाज शुरू किया और दिन-रात मेहनत कर उसे मौत के मुंह से निकाल लिया। डॉ. अभिनव की कोशिशों से बच्ची पूरी तरह ठीक हो गई, जिसने पूरे परिवार को खुशी और राहत दी।

डॉक्टर को माना लिया भगवान

लड़के के पिता के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने डॉ. अभिनव तोमर को केवल एक डॉक्टर नहीं, बल्कि अपनी बेटी का दूसरा जन्म देने वाला भगवान माना। अपनी कृतज्ञता और आस्था को व्यक्त करने के लिए विशाल ने एक अनोखा फैसला लिया। उन्होंने सावन माह में होने वाली कांवड़ यात्रा में हिस्सा लिया और हरिद्वार से 31 लीटर गंगाजल लेकर बड़ौत के लिए पैदल यात्रा शुरू की।

खास बात यह थी कि उनकी कांवड़ पर भगवान शिव या किसी अन्य देवता की तस्वीर नहीं, बल्कि डॉ. अभिनव तोमर की तस्वीर लगी थी। जब विशाल हरिद्वार से बड़ौत के लिए कांवड़ लेकर चले, तो रास्ते में कई शिवभक्तों की नजर उनकी अनोखी कांवड़ पर पड़ी। कांवड़ पर डॉक्टर की तस्वीर देखकर लोग हैरान रह गए। जब कुछ लोगों ने विशाल से इसका कारण पूछा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "ये वो हैं जिन्होंने मेरी बेटी को ज़िंदगी दी। मेरे लिए यही भगवान हैं। विशाल ने बताया कि उनकी बेटी के बचने की कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन डॉ. अभिनव ने हार नहीं मानी और उनकी बच्ची को नया जीवन दिया। इस कहानी को सुनकर राहगीर और अन्य श्रद्धालु भावुक हो गए और विशाल की इस अनोखी श्रद्धा की सराहना करने लगे।

विशाल ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि यह कांवड़ यात्रा उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने बताया कि इस बार वह 31 लीटर गंगाजल लेकर आए हैं, लेकिन अगले साल वह 51 लीटर जल लेकर आएंगे और हर साल डॉ. अभिनव के नाम पर कांवड़ यात्रा करेंगे। उनके लिए यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उस डॉक्टर के प्रति उनकी कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है, जिन्होंने उनके परिवार को सबसे बड़ी खुशी लौटाई है।

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