टेलीग्राम को लेकर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के सीईओ पावेल दुरोव ने दावा किया है कि टेलीग्राम की पहुंच बाधित होने के पीछे कुछ तकनीकी कारणों के साथ रिलायंस जियो की भूमिका भी हो सकती है। हालांकि जियो ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और कहा है कि उसका इस तरह की किसी गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।
क्या हैं पावेल दुरोव के आरोप?
दुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि BGP Hijacking नाम की तकनीक का इस्तेमाल कर भारत के बाहर कुछ देशों में भी टेलीग्राम की पहुंच प्रभावित की जा रही है। उनका दावा है कि इस मामले में की गई शिकायतों का भी जवाब नहीं दिया गया। दूसरी ओर, रिलायंस जियो का कहना है कि कंपनी इन आरोपों से सहमत नहीं है और ऐसी किसी घटना में शामिल नहीं रही है।
इंटरनेट कैसे करता है काम?
इंटरनेट किसी एक नेटवर्क से नहीं चलता। यह दुनिया भर की टेलीकॉम कंपनियों, डेटा सेंटरों, क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य नेटवर्क के आपसी जुड़ाव से बना है। जब कोई व्यक्ति टेलीग्राम, यूट्यूब या इंस्टाग्राम जैसी सेवाएं इस्तेमाल करता है, तो उसका डेटा कई नेटवर्क से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचता है। इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने में एक खास सिस्टम मदद करता है, जिसे BGP कहा जाता है।
क्या है BGP प्रोटोकॉल?
BGP यानी बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल इंटरनेट की रीढ़ माना जाता है। इसका काम अलग-अलग नेटवर्क को यह बताना होता है कि डेटा किस रास्ते से भेजा जाए। आसान शब्दों में कहें तो BGP इंटरनेट के लिए एक नेविगेशन सिस्टम की तरह काम करता है। यह नेटवर्कों के बीच लगातार जानकारी साझा करता है, जिससे डेटा सही जगह तक पहुंच सके।
कैसे होता है BGP Hijacking?
BGP सिस्टम काफी हद तक भरोसे पर आधारित होता है। यदि कोई नेटवर्क यह दावा कर दे कि वह किसी खास वेबसाइट या सर्वर तक पहुंचाने का सही रास्ता है, तो दूसरे नेटवर्क उस जानकारी को मान सकते हैं। अगर यह जानकारी गलत हो और डेटा को किसी दूसरे रास्ते पर भेज दिया जाए, तो इसे BGP Hijacking कहा जाता है। इस स्थिति में ट्रैफिक गलत दिशा में जा सकता है या किसी सेवा तक पहुंच बाधित हो सकती है।
क्यों बढ़ी इस तकनीक पर चर्चा?
हाल के विवाद के बाद BGP Hijacking फिर चर्चा में आ गया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से इस तकनीक से जुड़े जोखिमों पर चिंता जताते रहे हैं। हालांकि सुरक्षा उपायों में सुधार हुआ है, फिर भी समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। फिलहाल टेलीग्राम और जियो के बीच लगाए गए आरोपों की सच्चाई को लेकर बहस जारी है और तकनीकी जगत की नजर इस मामले पर बनी हुई है।
