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सावन का दूसरा सोमवार: महाकाल और काशी विश्वनाथ में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

सावन का दूसरा सोमवार: महाकाल और काशी विश्वनाथ में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

आज सावन का दूसरा सोमवार है, देशभर के शिवालयों मे भक्तों की लंबी-लंबी कतार देखने को मिली, श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति मे भक्त मगन दिखे, जिसके कारण शिव मंदिरों मे हर-हर, बम-बम के जयकारों से शिवालय गूंज उठे है, मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवन कि एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु उत्साह दिखे।

बता दें महाकाल मंदिर के कपाट तड़के 2:30 बजे खोले गए, सुबह भस्म आरती की गई। अभी करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर चुके है। महाकाल मंदिर में भस्म आरती का आयोजन विशेष रूप से किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने हिस्सा लिया। भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक हुआ, और उन्हें राजाधिराज स्वरूप में सजाया गया। शाम 4 बजे महाकाल की दूसरी शाही सवारी निकाली गई, जिसमें पहली बार भोपाल पुलिस मुख्यालय से 350 जवानों का विशेष पुलिस बैंड शामिल हुआ। सवारी के दौरान भक्तों ने "जय श्री महाकाल" के जयकारों के साथ भगवान का स्वागत किया। सवारी मार्ग पर सुरक्षा के लिए 1500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, और ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। इतना ही नही मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए, जिससे यह पवित्र दिन और भी यादगार बन गया।

काशी विश्वनाथ में 5 किमी तक भक्तों की लंबी कतार

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार को भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह 4 बजे मंगला आरती के साथ मंदिर के कपाट खोले गए, जिसमें बाबा विश्वनाथ को स्वर्ण मुकुट और राम नाम माला पहनाई गई। बाबा को गौरी-शंकर स्वरूप में विशेष रूप से सजाया गया, जिसके दर्शन के लिए देश-विदेश से आए लाखों भक्तों ने घंटों कतार में इंतजार किया। मंदिर के बाहर कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की 5 किलोमीटर लंबी कतार लगी रही।

मंदिर प्रशासन ने भक्तों के स्वागत के लिए मैदागिन और गोदौलिया की ओर से श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की। मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा और एसडीएम शंभु शरण की उपस्थिति में यह आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में भक्तों की सुविधा के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया, और जगह-जगह एयर कूलर, मिस्ट फैन, गुड़-पानी, ग्लूकोज, और बच्चों के लिए चॉकलेट-टॉफी की व्यवस्था की गई। अनुमान है कि इस दिन करीब 5 लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे। हालांकि, लंबी कतारों के कारण कुछ श्रद्धालुओं को असुविधा भी हुई। लखनऊ से आई एक महिला श्रद्धालु ने लंबे समय तक लाइन में खड़े रहने के कारण नाराजगी जताई। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए, जिसमें 5 स्थानों पर डॉक्टरों की टीम और दो एंबुलेंस तैनात की गईं।

देशभर में शिव भक्ति का उत्साह

सावन के दूसरे सोमवार को न केवल उज्जैन और वाराणसी, बल्कि देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ धाम में 8 किलोमीटर लंबी कतार लगी, जहां हर मिनट 180 भक्त जलाभिषेक कर रहे थे। उत्तराखंड के हरिद्वार में हर की पौड़ी पर भक्तों ने गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना की। अयोध्या के नागेश्वरनाथ मंदिर और प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर में भी भक्तों का तांता लगा रहा।

कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व

सावन माह में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। देश के विभिन्न हिस्सों से कांवड़िए गंगा जल लेकर शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए पहुंचे। वाराणसी में कांवड़ियों के लिए विशेष मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था की गई। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से स्मार्टवॉच, मोबाइल, बैग, और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं को मंदिर में न लाने की अपील की। मान्यता है कि इस माह में भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजन से पापों का नाश होता है, और भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। स्कंद पुराण और शिव पुराण के अनुसार, काशी में मृत्यु प्राप्त करने वाले को भगवान शिव स्वयं तारक मंत्र देकर मुक्ति प्रदान करते हैं।

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