रामलला के चढ़ावे को लेकर चल रही SIT जांच ने अयोध्या से लेकर लखनऊ तक हलचल बढ़ा दी है। मामला सिर्फ पैसों या आभूषणों का नहीं बल्कि करोड़ों भक्तों के भरोसे का है। शुरुआती रिपोर्टों में ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों कर्मचारियों और व्यवस्था पर सवाल उठने की बातें सामने आई हैं। दानपात्रों की चाबियों और रिकॉर्ड को लेकर भी जांच जारी है। हालांकि यह साफ है कि अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है और किसी की जिम्मेदारी FIR सबूत और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
योगी सरकार पर क्यों उठ रहे सवाल
SIT का गठन योगी आदित्यनाथ सरकार ने कराया है और रिपोर्ट भी शासन को सौंपी गई है। ऐसे में विपक्ष के पास सरकार को घेरने का मौका जरूर बन गया है। सवाल उठ रहे हैं कि मंदिर जैसी बड़ी व्यवस्था में निगरानी और रिकॉर्ड सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत क्यों नहीं था। अगर कथित अनियमितता साबित होती है तो विपक्ष इसे सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ेगा। लेकिन जांच शुरू कराना यह भी दिखाता है कि सरकार मामले को दबाने के बजाय सामने लाने की कोशिश कर रही है।
ट्रस्ट और सरकार की जिम्मेदारी अलग
राम मंदिर का रोजमर्रा प्रबंधन सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के हाथ में नहीं चलता। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक अलग संस्था है जिसमें पदाधिकारी और प्रबंधन से जुड़े लोग अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसलिए कथित गड़बड़ी का पूरा आरोप सीधे सरकार पर डाल देना जल्दबाजी होगी। फिर भी मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं के भरोसे की जिम्मेदारी सरकार से अलग नहीं हो सकती। जांच के बाद ऑडिट CCTV और प्रबंधन व्यवस्था में बदलाव की जरूरत सामने आ सकती है।
दिल्ली लखनऊ के रिश्तों पर अटकलें
2027 चुनाव से पहले बीजेपी के भीतर टिकट संगठन और नेताओं की भूमिका को लेकर चर्चा तेज होना सामान्य है। कौन दिल्ली के करीब है और कौन लखनऊ के साथ मजबूत है ऐसी बातें राजनीतिक गलियारों में चलती रहती हैं। लेकिन इन चर्चाओं को अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बीच टकराव का सबूत मानना सही नहीं होगा। दोनों नेताओं की जिम्मेदारियां अलग हैं। केंद्रीय नेतृत्व चुनावी रणनीति और संगठन देखता है जबकि मुख्यमंत्री राज्य सरकार और प्रशासन की दिशा तय करते हैं।
वोट बैंक की नई रणनीति
बीजेपी दलित पिछड़े महिला लाभार्थी और गैर यादव OBC वोटरों के बीच अपनी पकड़ लगातार मजबूत करने में जुटी है। मुस्लिम समाज तक पहुंच बनाने की कोशिशों की चर्चा भी होती रही है। इसका मतलब यह नहीं कि पार्टी अपने पारंपरिक समर्थक वर्गों से दूरी बना रही है। यूपी जैसे बड़े राज्य में किसी एक जाति या वर्ग के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता। विपक्ष सामान्य वर्ग की नाराजगी UGC विवाद और दूसरे मुद्दों को उठाकर बीजेपी को घेरने की कोशिश करेगा।
जांच से निकलेगा असली सच
राम मंदिर के चढ़ावे का मामला राजनीति से पहले आस्था और जवाबदेही का मामला है। अगर किसी ने भक्तों के दान के साथ गलत किया है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अगर किसी पर बेबुनियाद आरोप लगे हैं तो उन्हें भी न्याय मिलना चाहिए। SIT की रिपोर्ट से तय होगा कि FIR होगी या नहीं और किस स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। 2027 की राजनीति में यह मुद्दा कितना बड़ा बनेगा यह बाद की बात है लेकिन अभी सबसे जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो और मंदिर के चढ़ावे का हर हिसाब साफ सामने आए।
