पश्चिम एशिया में हालात अचानक बेहद गंभीर हो गए जब इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड पर हमला किया। इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर समेत कई देशों के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बना दिया। इस टकराव ने पूरे ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
कतर का सबसे बड़ा गैस प्लांट बना निशाना
ईरान की मिसाइलों का सबसे ज्यादा असर कतर के रास लाफान इलाके पर पड़ा, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस हब माना जाता है। यहां एलएनजी बनाने और सप्लाई करने की मुख्य सुविधाएं मौजूद हैं। हमले के बाद इस पूरे सिस्टम को भारी नुकसान हुआ है, जिससे गैस सप्लाई पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
5 साल तक असर रहने का अनुमान
कतर के ऊर्जा अधिकारियों के मुताबिक इस हमले से हुए नुकसान को ठीक करने में लंबा समय लग सकता है। शुरुआती आकलन में कहा गया है कि पूरी तरह सुधार होने में तीन से पांच साल तक लग सकते हैं। इसका मतलब है कि दुनिया भर में गैस की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है।
वैश्विक गैस सप्लाई पर बड़ा झटका
हमले के कारण कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता का एक बड़ा हिस्सा ठप हो गया है। इससे यूरोप और एशिया जैसे बड़े बाजारों में गैस की उपलब्धता कम हो सकती है। कई देशों को अब वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे कीमतों में तेजी आने की आशंका है।
ऊर्जा बाजार में बढ़ी अनिश्चितता
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि युद्ध का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। तेल और गैस जैसे जरूरी संसाधनों पर असर पड़ने से महंगाई और सप्लाई संकट दोनों बढ़ सकते हैं।
आगे क्या होंगे हालात, सबकी नजरें टिकीं
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह संघर्ष कब तक जारी रहेगा और इसका असर कितना गहरा होगा। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो ऊर्जा संकट और बढ़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इसी पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह स्थिति किस दिशा में जाती है।
