प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस साल दिवाली तक (GST) में अगली पीढ़ी के सुधार लागू किए जाएंगे, जिसे उन्होंने "डबल दिवाली तोहफा" करार दिया। इन सुधारों का उद्देश्य आम लोगों और छोटे-मध्यम उद्यमों (MSME) पर टैक्स का बोझ कम करना है। आइए जानते है GST कम होने से क्या-क्या बदलेगा?
पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा था, "हमने पिछले वर्षों में टैक्स बोझ कम किया है, टैक्सेशन आसान बनाया है। अब दिवाली तक जीएसटी में बड़े बदलाव होंगे, जो उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों दोनों को फायदा देंगे।" उन्होंने इन सुधारों को "रिफॉर्म, परफॉर्म, और ट्रांसफॉर्म" के मंत्र से जोड़ा, जिसका लक्ष्य भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि ये सुधार दिवाली 2025 तक लागू हो जाएंगे, जिससे उपभोक्ताओं और कारोबारियों को तत्काल लाभ मिलेगा। जीएसटी दरों के युक्तिकरण पर चर्चा के लिए बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) की बैठक अगले सप्ताह होने की संभावना है। इस बैठक में दरों में कटौती और स्लैब संरचना पर अंतिम सिफारिशें दी जा सकती हैं। 9 सितंबर 2025 को जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक होगी, जिसमें केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्री इन सुधारों पर चर्चा करेंगे और मंजूरी दे सकते हैं।
GST सुधारों की मुख्य बातें
जीएसटी दरों में कटौती
मौजूदा जीएसटी ढांचे में पांच स्लैब हैं: 0%, 5%, 12%, 18%, और 28%। सूत्रों के अनुसार, इन स्लैब्स को घटाकर तीन करने का प्रस्ताव है। विशेष रूप से, 12% और 18% स्लैब को मर्ज करने की चर्चा है, जिससे कई उत्पादों और सेवाओं की कीमतें कम हो सकती हैं। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि 28% टैक्स स्लैब में शामिल लगभग 90% सामानों को 18% स्लैब में लाया जा सकता है। इससे रोजमर्रा की वस्तुएं और सेवाएं सस्ती हो सकती हैं।
आम लोगों को राहत
पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी सुधारों से दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर टैक्स में भारी कमी आएगी। इससे उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिलेगी, और रोजमर्रा की जरूरतों जैसे खाद्य पदार्थ, घरेलू सामान, और अन्य आवश्यक वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।
MSME और छोटे कारोबारियों को लाभ
छोटे और मझोले उद्यमों (MSME) के लिए टैक्स बोझ कम करने पर विशेष जोर है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को और सरल किया जाएगा, और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रिफंड प्रक्रिया को तेज करने की योजना है। इससे छोटे कारोबारियों की लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा।
हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर टैक्स में कमी:
ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस सेवाओं पर जीएसटी दरों में कमी की सिफारिश कर सकता है। इससे बीमा योजनाएं सस्ती हो सकती हैं, जिससे अधिक लोग इनका लाभ उठा सकेंगे।
अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
कम टैक्स दरों से उपभोक्ता खर्च बढ़ने की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था को गति देगा। जीएसटी संग्रह में हाल के वर्षों में रिकॉर्ड वृद्धि (2024-25 में 22.08 लाख करोड़ रुपये) देखी गई है, और ये सुधार इसे और मजबूत करेंगे।
क्या-क्या होगा सस्ता?
जीएसटी दरों में कमी से कई वस्तुएं और सेवाएं सस्ती होने की उम्मीद है। जैसे...
1. ऑटोमोबाइल (छोटी कारें और टू-व्हीलर)
- छोटी पेट्रोल और डीजल कारों (1200 सीसी से कम पेट्रोल और 1500 सीसी से कम डीजल, 4 मीटर से कम लंबाई) और 500 सीसी तक के टू-व्हीलर्स पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, ऑटोमोबाइल पर लगने वाला सेस भी हटाया जा सकता है।
- मारुति सुजुकी (जैसे अल्टो, डिजायर, वैगन-आर), हुंडई, और टाटा मोटर्स जैसे निर्माताओं को फायदा होगा। छोटी कारों की कीमतों में 8-10% की कमी आ सकती है, जिससे ये वाहन मध्यम वर्ग के लिए अधिक किफायती होंगे।
2. उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं (Consumer Durables)
- एयर कंडीशनर, बड़े स्क्रीन वाले टीवी (32 इंच से अधिक), रेफ्रिजरेटर, और वॉशिंग मशीन जैसे उत्पादों पर जीएसटी 28% से घटकर 18% हो सकता है।
- इन उत्पादों की कीमतों में 8-9% की कमी की उम्मीद है, जिससे उपभोक्ता मांग बढ़ेगी। यह विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा दे सकता है।
3. आवश्यक वस्तुएं और एफएमसीजी (FMCG)
- 12% स्लैब में मौजूद कई आवश्यक वस्तुओं जैसे पैकेज्ड फूड, गैर-अल्कोहलिक पेय, कुछ डेयरी उत्पाद, कपड़े, और आयुर्वेदिक उत्पादों को 5% स्लैब में लाने की योजना।
- छोटे पैक (10 रुपये से कम) जैसे स्नैक्स, साबुन, और कुकवेयर की कीमतें कम हो सकती हैं। इससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
4. बीमा प्रीमियम
- स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी को 18% से घटाकर 5% या शून्य करने का प्रस्ताव।
- बीमा अधिक किफायती होगा, जिससे बीमा क्षेत्र में पहुंच बढ़ेगी। यह विशेष रूप से ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग के लिए फायदेमंद होगा।
5. सीमेंट और निर्माण सामग्री
- प्रस्तावित बदलाव: सीमेंट पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% करने की चर्चा।
- प्रभाव: निर्माण सामग्री की लागत कम होने से रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत घट सकती है, जिससे आवास और अन्य निर्माण गतिविधियां सस्ती होंगी।
6. अन्य क्षेत्र
- कपड़ा और कृषि: टेक्सटाइल, कृषि, उर्वरक, और नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित उत्पादों पर जीएसटी कम होने की संभावना।
- सेवाएं: आतिथ्य, स्वास्थ्य सेवा, और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी कर राहत की उम्मीद है।



