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सस्ते मोबाइल के चक्कर में न हो जाएं कंगाल, ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर बढ़ा नया साइबर जाल

सस्ते मोबाइल के चक्कर में न हो जाएं कंगाल, ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर बढ़ा नया साइबर जाल

डिजिटल दौर में ऑनलाइन शॉपिंग लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे सामान खरीदने के लिए लोग बड़ी संख्या में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इसी बढ़ती ऑनलाइन खरीदारी का फायदा साइबर ठग भी उठा रहे हैं। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने लोगों को ऐसे नए ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम से सावधान रहने की सलाह दी है। खासकर उन लोगों को जो भारी छूट देखकर जल्दबाजी में खरीदारी कर लेते हैं।

फर्जी वेबसाइट बनाकर लगाया जाता है जाल

साइबर अपराधी बड़ी कंपनियों जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट तैयार करते हैं। इन वेबसाइटों पर महंगे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान बेहद कम कीमत में दिखाए जाते हैं। ग्राहक जब सस्ते ऑफर के लालच में आकर ऑर्डर करते हैं तो उनके साथ धोखाधड़ी हो जाती है। कई मामलों में पैसे लेने के बाद सामान भेजा ही नहीं जाता, जबकि कुछ मामलों में नकली या बेकार उत्पाद भेज दिए जाते हैं।

क्यूआर कोड और ओटीपी का नया खेल

ठग सिर्फ फर्जी वेबसाइट तक सीमित नहीं हैं। कई बार कैश ऑन डिलीवरी के नाम पर ग्राहकों को क्यूआर कोड स्कैन करने के लिए कहा जाता है। लोग भुगतान समझकर कोड स्कैन कर लेते हैं और उनके खाते से पैसे निकल जाते हैं। इसके अलावा फर्जी ईएमआई अप्रूवल कॉल करके ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी और बैंकिंग जानकारी भी मांगी जाती है। जैसे ही व्यक्ति यह जानकारी साझा करता है, उसका बैंक खाता खाली हो सकता है।

रिफंड के नाम पर भी हो रही ठगी

आजकल ऑर्डर फेल होने या रिफंड मिलने के नाम पर भी फर्जी संदेश भेजे जा रहे हैं। इन संदेशों में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में खतरनाक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसके जरिए साइबर अपराधी फोन में मौजूद बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और निजी डेटा तक पहुंच बना लेते हैं। इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचना बेहद जरूरी है।

ऐसे रखें खुद को सुरक्षित

ऑनलाइन खरीदारी करते समय हमेशा वेबसाइट का पता ध्यान से जांचें। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, सीवीवी, यूपीआई पिन या बैंक की गोपनीय जानकारी साझा न करें। किसी अनजान क्यूआर कोड को स्कैन न करें। अपने ऑर्डर की जानकारी केवल आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से ही प्राप्त करें। खरीदारी हमेशा भरोसेमंद और सत्यापित प्लेटफॉर्म से ही करें।

ठगी हो जाए तो तुरंत करें शिकायत

अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम का शिकार हो जाते हैं तो देर न करें। तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं या 1930 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। समय पर शिकायत करने से पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।

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