सावन का पहला दिन, काशी विश्वनाथ में उमड़ा भक्तों का जन सैलाब, हर-हर महादेव के जयकारे से गुंज उठा धाम
सवान का पवित्र महीना शुरू हो चुका है, इसी मौके पर देश के सभी शिवालयों मे भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुच रहे है, वही बाबा काशी विश्वनाथ धाम मे भक्तों का जमावड़ा देखने को मिला, हर-हर महादेव के जयकारे से पूरा धाम गूंज उठा।
आपको बता दें सावन मे भगवान शिव की नगरी बाबा विश्वनाथ के धाम का तो सावन का अद्भुत नज़ारा ही कुछ और होता है,लाखों श्रद्धालु, गंगा के घाट, घंटियों की गूंज, हर-हर महादेव का जयकारा और बाबा विश्वनाथ के दरबार में उमड़ी आस्था की बेमिसाल भीड़ हर सावन में काशी की फिज़ा ही बदल जाती है, कुछ ऐसा ही हुआ जब मंदिर के घंटों की टन-टन, डमरू की थाप, गंगा घाटों पर हर हर महादेव के जयकारे और शिवभक्तों की टोलियाँ से मानो पूरा शहर शिवमय हो गया।
कहते हैं काशी शिव की नगरी है और सावन शिव का महीना इस पवित्र संगम में जो अलौकिकता दिखती है वो शायद दुनिया में कहीं और नहीं हर साल सावन के महीने में काशी विश्वनाथ धाम में लाखों भक्त जुटते हैं, कोई कोसों दूर से कांवड़ लेकर आता है तो कोई गंगा जल से बाबा का अभिषेक करने काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास करीब ढाई हजार साल पुराना माना जाता है।
कहा जाता है आदि शंकराचार्य से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज, अहिल्याबाई होल्कर, रानी लक्ष्मीबाई, और जाने कितने ही शासक और संतों ने इस मंदिर को संजोया, सजाया और संरक्षित किया, मौजूदा भव्यता का श्रेय जाता है मराठा महारानी अहिल्याबाई होल्कर को जिन्होंने 1780 में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था जिसे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर ने मंदिर को एक नया आयाम दे दिया गया है।
आपको बता दें गंगा से लाए गए पवित्र जल से बाबा का रूद्राभिषेक होता है। भक्त अपनी आस्था की डोर में बंधे हुए, घंटों कतार में खड़े रहते हैं उनके लिए ये सिर्फ पूजा नहीं बल्कि जीवन का सबसे बड़ा पुण्य है, प्रशासन ने भी व्यवस्थाएँ कड़ी कर दी हैं, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम हैं, ताकि लाखों श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी ना हो और काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बनने के बाद से, अब श्रद्धालुओं के लिए मंदिर तक पहुंचना और भी आसान हो गया है, पहले जहां मंदिर परिसर संकरी गलियों में सिमटा था,अब वही परिसर विशाल और भव्य नजर आता है। गंगा घाट से लेकर मंदिर तक सीधी चौड़ी राह भव्य प्रवेश द्वार, संगमरमर की नक्काशी, और रोशनी की जगमगाहट सबकुछ भक्तों को एक अलौकिक अनुभूति है। सावन में शिवभक्ति का रंग और काशी की रौनक दोनों ही देखने लायक होती है बाबा विश्वनाथ के दरबार में हर कोई एक ही अरदास लेकर आता है सुख, शांति और कल्याण की और यही वजह है कि कहते हैं काशी में शिव स्वयं बसते हैं, और सावन उनका सबसे प्रिय महीना है।



