उत्तराखंड सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इन बदलावों का उद्देश्य UCC को और अधिक जन-अनुकूल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाना है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ा है, जिसमें 21 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों के मामले में रजिस्ट्रार द्वारा पैरेंट्स या अभिभावकों को सूचित करने की अनिवार्यता को हटाने का प्रस्ताव है। यह जानकारी राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल एक हलफनामे से सामने आई है।
UCC के नियमों में संशोधन के मसौदे में कई अन्य बदलाव भी शामिल हैं, जो लिव-इन रिलेशनशिप की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाने और गोपनीयता की रक्षा करने पर केंद्रित हैं। सरकार का कहना है कि ये बदलाव UCC के कार्यान्वयन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करेंगे और नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
UCC में प्रमुख बदलाव
उत्तराखंड सरकार ने हाईकोर्ट में 78 पेज का हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें UCC नियमों के संशोधन का मसौदा प्रस्तुत किया गया है। ये संशोधन मुख्य रूप से लिव-इन रिलेशनशिप, विवाह रजिस्ट्रेशन और अपील प्रक्रिया से जुड़े हैं। निम्नलिखित हैं कुछ प्रमुख प्रस्ताव:
- पैरेंट्स को सूचना न देने का प्रावधान: वर्तमान नियमों के अनुसार, अगर लिव-इन पार्टनर में से कोई 21 वर्ष से कम उम्र का है, तो रजिस्ट्रार को उसके पैरेंट्स या अभिभावकों को ईमेल, एसएमएस, व्हाट्सएप या पोस्ट के माध्यम से सूचित करना अनिवार्य है। नए मसौदे में इस क्लॉज को पूरी तरह हटा दिया जाएगा। इससे युवा वयस्कों की गोपनीयता बढ़ेगी और अनावश्यक हस्तक्षेप कम होगा।
- गोपनीयता और डेटा सुरक्षा: रजिस्ट्रार और स्थानीय पुलिस के बीच डेटा शेयरिंग को केवल रिकॉर्ड-कीपिंग तक सीमित कर दिया जाएगा। पहले के नियम में अन्य विभागों के साथ जानकारी साझा करने की अनुमति थी, जिसे हटाया जा रहा है। पुलिस स्टेशन के अधिकारी-इन-चार्ज और एसपी को जानकारी की गोपनीयता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि लिव-इन कपल्स को उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।
- अपील की समय सीमा में वृद्धि: अगर रजिस्ट्रार लिव-इन रिलेशनशिप के स्टेटमेंट को अस्वीकार करता है, तो अपील की समय सीमा 30 दिनों से बढ़ाकर 45 दिन की जाएगी। यह बदलाव विशेष रूप से पहाड़ी जिलों में रहने वाले नागरिकों की सुविधा के लिए है, जहां यात्रा और दस्तावेज जुटाने में अधिक समय लगता है।
- पहचान सत्यापन में लचीलापन: आधार कार्ड न होने पर वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों को स्वीकार किया जाएगा, जिससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
- रजिस्ट्रार की शक्तियों में कटौती: रजिस्ट्रार को पैरेंट्स, अभिभावकों या कम्युनिटी लीडर्स के फोन नंबर, ईमेल और पते सत्यापित करने की शक्ति सीमित की जाएगी। पहले के लिव-इन रिलेशनशिप की 'डिस्क्रीट इंक्वायरी' का प्रावधान हटाया जाएगा। साथ ही, लिव-इन पार्टनर्स को साझा आवास के लिए टेनेंट वेरिफिकेशन की आवश्यकता नहीं होगी।
- पिछली रिलेशनशिप और गर्भावस्था संबंधी रिपोर्टिंग हटाई जाएगी: रजिस्ट्रार को पिछले विवाह या लिव-इन की डिटेल्स डिस्क्लोज करने की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही, टर्मिनेशन के समय महिला पार्टनर की गर्भावस्था या बच्चे के जन्म की रिपोर्टिंग का प्रावधान समाप्त किया जाएगा।
वर्तमान UCC नियम क्या कहते हैं?
उत्तराखंड UCC नियम 2025 के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को 30 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। अगर कोई पार्टनर 21 वर्ष से कम उम्र का है, तो रजिस्ट्रार पैरेंट्स को सूचित करता है। गैर-अनुपालन पर जुर्माना या सजा का प्रावधान है। हालांकि, नए प्रस्ताव इन नियमों को अधिक उदार बनाने का प्रयास करते हैं।
UCC ड्राफ्टिंग कमिटी के सदस्य मनु गौड़ ने कहा, "ये संशोधन UCC को पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए हैं। हमने कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं को ध्यान में रखा है, ताकि व्यक्तिगत गोपनीयता का सम्मान हो और अनावश्यक जटिलताएं दूर हों।"
जानें पूरा मामला?
उत्तराखंड में UCC फरवरी 2024 में लागू किया गया था, जो देश का पहला ऐसा कानून है जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को एकसमान नियमों से नियंत्रित करता है। हालांकि, लिव-इन रजिस्ट्रेशन और पैरेंटल नोटिफिकेशन के प्रावधानों पर काफी विवाद हुआ था। कई संगठनों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया था। अब प्रस्तावित बदलाव इन आलोचनाओं को संबोधित करने का प्रयास लगते हैं।
सरकार का कहना है कि ये संशोधन UCC के मूल उद्देश्यों से समझौता किए बिना लागू किए जाएंगे। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने इन बदलावों को 'नागरिक सुरक्षा' का ड्राफ्ट बताया है। अंतिम फैसला कोर्ट की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
यह खबर उत्तराखंड में UCC के कार्यान्वयन को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो युवाओं और कपल्स की गोपनीयता को प्राथमिकता देता है। अधिक जानकारी के लिए UCC की आधिकारिक वेबसाइट ucc.uk.gov.in पर जाएं।



