लोकसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर (संख्या 2) विधेयक, 2025 और कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 को पेश किया, जो सदन में पारित हो गए।
नया आयकर विधेयक 2025 में प्रवर समिति की 285 सिफारिशों को शामिल किया गया है, जिनमें 32 बड़े बदलाव हैं। इनका उद्देश्य कर प्रणाली को आसान और करदाताओं के लिए सुविधाजनक बनाना है। पुराने ड्राफ्ट में अगर करदाता ने निर्धारित तारीख के बाद आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल किया, तो रिफंड का दावा नहीं मिलता था। नए विधेयक में यह शर्त हटा दी गई है, जिससे देर से रिटर्न दाखिल करने वालों को भी रिफंड मिलेगा। सेक्शन 80M के तहत इंटर-कॉरपोरेट डिविडेंड पर कटौती का लाभ उन कंपनियों को भी मिलेगा, जो विशेष दर (धारा 115BAA) का लाभ लेती हैं। यह प्रावधान पहले ड्राफ्ट में नहीं था। करदाताओं को बिना टैक्स देनदारी के NIL TDS प्रमाणपत्र लेने की सुविधा दी गई है। पिछला वर्ष" और "निर्धारण वर्ष" की अवधारणा को हटाकर एकीकृत "टैक्स ईयर" लागू किया गया है, जिससे गणना और भुगतान प्रक्रिया सरल होगी।
काल्पनिक किराए पर टैक्स लगाने का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। गुमनाम दान केवल धार्मिक ट्रस्टों तक सीमित होंगे, सामाजिक सेवा ट्रस्टों को इस छूट से बाहर रखा गया है। नए विधेयक में धाराओं की संख्या 816 से घटाकर 536 और अध्यायों की संख्या 47 से 23 कर दी गई है। शब्दों की संख्या 5.12 लाख से 2.6 लाख तक कम की गई है, जिससे कानून को समझना आसान होगा।
आपको बता दें यह विधेयक पहली बार 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था और इसे जांच के लिए बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय प्रवर समिति को भेजा गया था। समिति ने 21 जुलाई 2025 को अपनी 4,500 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 285 सुझाव शामिल थे। पुराना ड्राफ्ट 8 अगस्त 2025 को वापस ले लिया गया था, ताकि भ्रम से बचा जा सके और सभी संशोधनों को एक नए, स्पष्ट ड्राफ्ट में शामिल किया जा सके। नया आयकर विधेयक 2025, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है। यह विधेयक मुकदमेबाजी को कम करने, डिजिटल युग के अनुरूप नियम बनाने, और करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर केंद्रित है। सरकार का दावा है कि यह बिल न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि आम लोगों के लिए भी समझने में आसान होगा।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर संशोधनों को अलग-अलग लागू करना जटिल होता, इसलिए नया ड्राफ्ट पेश करना समय की बचत और विधायी स्पष्टता के लिए जरूरी था।
आयकर विधेयक के साथ-साथ, लोकसभा में दो खेल विधेयक भी पेश किए गए। हालांकि, इन विधेयकों के बारे में विस्तृत जानकारी सीमित है, लेकिन ये भारत में खेलों को बढ़ावा देने और खेल प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। इन विधेयकों का उद्देश्य खेल ढांचे को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना हो सकता है, लेकिन विशिष्ट प्रावधानों पर अभी और जानकारी का इंतजार है।



