logo

BREAKING NEWS
महाकाल से शिरडी तक करोड़ों का चढ़ावा, आखिर मंदिरों में कैसे रखा जाता है दान का पूरा हिसाब?

महाकाल से शिरडी तक करोड़ों का चढ़ावा, आखिर मंदिरों में कैसे रखा जाता है दान का पूरा हिसाब?

देश के बड़े मंदिरों में हर साल करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। कोई नकद दान देता है तो कोई सोना चांदी और कीमती आभूषण चढ़ाता है। अब डिजिटल दान का चलन भी तेजी से बढ़ गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि मंदिरों में आने वाले इस पैसे और कीमती सामान का हिसाब आखिर कैसे रखा जाता है। श्री महाकालेश्वर मंदिर, मां विंध्यवासिनी मंदिर और शिरडी साईबाबा मंदिर की व्यवस्था इस बहस को और अहम बना देती है।

महाकाल में CCTV से लेकर डिजिटल दान तक

उज्जैन के महाकाल मंदिर में दान पेटियों पर चौबीस घंटे CCTV निगरानी रखी जाती है। मंदिर समिति के मुताबिक दान की गिनती एक विशेष कक्ष में अधिकारियों की मौजूदगी में होती है। गिनती में शामिल कर्मचारियों की सुरक्षा जांच भी सख्त होती है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। श्रद्धालुओं के लिए QR कोड के जरिए डिजिटल दान की सुविधा भी दी गई है। मंदिर समिति के अनुमान के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल आय करीब 142 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

दानपेटी से प्रसाद तक आता है पैसा

महाकाल मंदिर में दानपेटियों से बड़ी रकम आती है जबकि नकद काउंटर ऑनलाइन दान और गुप्त दान भी आय के बड़े स्रोत हैं। इसके अलावा लड्डू प्रसाद की बिक्री से भी मंदिर को बड़ी आमदनी होती है। दान की गिनती के बाद रकम का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है और फिर इसे बैंकिंग प्रक्रिया के जरिए जमा कराया जाता है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि डिजिटल भुगतान बढ़ने से नकद राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता और आसानी दोनों बढ़ी हैं।

विंध्याचल में रिकॉर्ड पर उठे सवाल

विंध्याचल धाम में दान व्यवस्था को लेकर रिकॉर्ड और आभूषणों के मूल्यांकन पर सवाल उठे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि सोने चांदी के आभूषणों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता। हालांकि विंध्य विकास परिषद इन आरोपों को खारिज करती है। परिषद का कहना है कि विंध्याचल कालीखोह और अष्टभुजा मंदिरों में कुल 22 दान पात्र हैं। इनकी गिनती तीन से चार महीने में मजिस्ट्रेट की निगरानी और CCTV कैमरों के बीच कराई जाती है।

डबल लॉकर में रखे जाते हैं आभूषण

विंध्याचल मंदिर प्रशासन के मुताबिक दान में मिले सोने चांदी और दूसरे कीमती आभूषण डबल लॉकर में सुरक्षित रखे जाते हैं। गिनती के दौरान प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहते हैं और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड बनाया जाता है। लेकिन श्रद्धालुओं की मांग है कि आभूषणों का वजन मूल्यांकन और उपयोग से जुड़ी जानकारी भी समय समय पर सार्वजनिक होनी चाहिए। यही वजह है कि मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता की बहस लगातार तेज होती जा रही है।

शिरडी में बैंक अधिकारी भी रहते हैं मौजूद

शिरडी साईबाबा ट्रस्ट में दान की गिनती सप्ताह में दो बार विशेष काउंटिंग हॉल में की जाती है। इस दौरान बैंक अधिकारी चैरिटी कमिश्नर के प्रतिनिधि और सुरक्षा कर्मी मौजूद रहते हैं। पूरी प्रक्रिया CCTV की निगरानी में होती है और गिनती के बाद नकद राशि राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा करा दी जाती है। ट्रस्ट के अनुसार यहां करीब 550 किलो सोना और 7030 किलो चांदी सुरक्षित है। बड़े मंदिरों की यही व्यवस्था बताती है कि करोड़ों के चढ़ावे में सुरक्षा के साथ जवाबदेही और खुला हिसाब सबसे जरूरी है।

Leave Your Comment