साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 7 सितंबर यानि की आज लगने जा रहा है। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। यह खगोलीय घटना न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि हिंदू धर्म में इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी है। यह ग्रहण भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा, जो पितृपक्ष के आरंभ का दिन भी है। आइए, इस चंद्र ग्रहण के समय, दृश्यता, सूतक काल और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।
चंद्र ग्रहण भारत के सभी हिस्सों में दिखाई देगा। इसके अलावा एशिया, यूरोप (इंग्लैंड, इटली, जर्मनी, फ्रांस आदि) ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अफ्रीका, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्से, प्रशांत और अटलांटिक महासागर के क्षेत्र, भारत में चंद्र ग्रहण का दृश्य साफ मौसम होने पर रात में आसानी से देखा जा सकता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस ग्रहण का सूतक काल 7 सितंबर 2025 को दोपहर 12:57 बजे से शुरू होकर ग्रहण समाप्त होने के साथ, यानी की रात 1:26 बजे समाप्त होगा। सूतक काल के दौरान कुछ सांस्कृतिक और धार्मिक नियमों का पालन किया जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं, और पूजा, हवन या अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। सूतक काल में भोजन बनाना या खाना वर्जित है। हालांकि, गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग फल या हल्का भोजन ले सकते हैं, बशर्ते उसमें तुलसी के पत्ते डाले जाएं। इस दौरान भगवान के मंत्रों का जाप, जैसे चंद्र देव का बीज मंत्र "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः" या अन्य मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है।
ग्रहण के प्रमुख चरण इस प्रकार
- ग्रहण का आरंभ: रात 9:58 बजे
- पूर्ण ग्रहण (खग्रास) शुरू: रात 11:01 बजे
- ग्रहण का मध्य: रात 11:42 बजे
- पूर्ण ग्रहण समाप्त: रात 12:22 बजे
- ग्रहण का समापन: रात 1:26 बजे
इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे "ब्लड मून" के नाम से भी जाना जाता है। यह घटना तब होती है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से छनकर चंद्रमा तक पहुंचता है, जिससे चांद लाल नजर आता है।
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
- ग्रहण समाप्त होने के बाद पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है।
- दान, मंत्र जाप, और ध्यान करना लाभकारी होता है।
- भोजन में तुलसी के पत्ते डालकर उसे सुरक्षित रखें।
- ग्रहण के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
क्या न करें:
गर्भवती महिलाएं नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करें।
ग्रहण को नंगी आंखों से न देखें; सुरक्षित उपकरणों का उपयोग करें।
सूतक काल में भोजन पकाना या खाना वर्जित है।
मंदिरों में पूजा-पाठ या मूर्तियों को स्पर्श न करें।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय और धार्मिक घटना माना जाता है। यह ग्रहण कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में होगा, जिसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। ज्योतिषियों के अनुसार, यह ग्रहण राहु और केतु के प्रभाव से होता है, जो जीवन में परिवर्तन और आध्यात्मिक जागरूकता ला सकता है। कुछ राशियों, जैसे मेष, मिथुन और कन्या, के लिए यह ग्रहण शुभ फलदायी हो सकता है, जबकि सिंह और कुंभ राशि वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, यह ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है, जो पितृपक्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन श्राद्ध कर्म किए जाते हैं, लेकिन ज्योतिषियों का सुझाव है कि सूतक काल शुरू होने से पहले ही श्राद्ध और तर्पण के कार्य पूरे कर लिए जाएं।



