उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना' के तहत कानपुर शहर में एक हाईटेक डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण शुरू होने जा रहा है। फूलबाग स्थित ऐतिहासिक गांधी भवन को नया रूप दिया जाएगा, जहां 50 हजार से अधिक किताबों का विशाल संग्रह डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध होगा। इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने 4 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी है, और निर्माण कार्य अप्रैल 2026 से पटरी पर दौड़ने की उम्मीद है। यह पहल न केवल छात्रों और युवाओं को आधुनिक शिक्षा के द्वार खोलेगी, बल्कि कानपुर को डिजिटल शिक्षा का हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
गांधी भवन, जो पहले से ही 10 हजार से अधिक किताबों का घर है, अब एक पूर्ण रूप से डिजिटल लाइब्रेरी में तब्दील हो जाएगा। यहां मेडिकल, इंजीनियरिंग, आर्ट्स और अन्य पाठ्यक्रमों की किताबों के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, NEET) की तैयारी के लिए विशेष सामग्री उपलब्ध होगी। लाइब्रेरी में हाई-स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट टैबलेट्स, ई-रीडर्स और वर्चुअल रियलिटी (VR) आधारित लर्निंग जोन की सुविधा होगी। छात्र रिमोट एक्सेस के जरिए घर बैठे भी किताबें डाउनलोड कर सकेंगे।
नगर निगम के मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी ने बताया, "यह योजना कानपुर के युवाओं को वैश्विक स्तर की शिक्षा से जोड़ने का प्रयास है। गांधी भवन का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह शहर के केंद्र में स्थित है और आसानी से पहुंच योग्य है। निर्माण के दौरान भवन को भूकंप प्रतिरोधी बनाया जाएगा, साथ ही सोलर पैनल्स से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।" प्रोजेक्ट की कुल लागत 9.63 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर दिया गया है।
222 डिजिटल लाइब्रेरी का प्लान
शहर के साथ-साथ कानपुर के ग्रामीण इलाकों में भी डिजिटल शिक्षा की लहर फैलाई जाएगी। जिला प्रशासन के अनुसार, 111 ग्राम पंचायतों में कुल 222 डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जाएंगी। ये लाइब्रेरी पंचायत भवनों में ही बनेंगी, जहां स्मार्ट एलईडी स्क्रीन, डेस्कटॉप कंप्यूटर, प्रिंटर, UPS और पुस्तक रैक्स जैसी सुविधाएं होंगी। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को ध्यान में रखते हुए ये लाइब्रेरी 24x7 सुरक्षित रहेंगी।
सीडीओ दीक्षा जैन ने कहा, "ग्रामीण युवाओं को शहर की सुविधाओं से वंचित रखना अब पुरानी बात हो गई। इन ई-लाइब्रेरी में डिजिटल फॉर्मेट में पढ़ाई होगी, जहां ऑनलाइन कोर्स, ई-बुक्स और वीडियो लेक्चर्स उपलब्ध होंगे। इससे न केवल शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा, बल्कि डिजिटल डिवाइड को भी कम किया जा सकेगा।" कानपुर देहात के 204 गांवों में भी इसी तरह की योजना पर काम चल रहा है, जहां नए पंचायत भवनों में डिजिटल लाइब्रेरी इंस्टॉल की जाएंगी।
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शिक्षा और विकास पर प्रभाव
यह पहल कानपुर के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। वर्तमान में शहर में पारंपरिक लाइब्रेरी की कमी के कारण छात्रों को किताबें जुटाने में कठिनाई होती है। डिजिटल लाइब्रेरी से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण अनुकूल भी साबित होगी क्योंकि पेपरलेस रीडिंग को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जैसे डिजिटल कंटेंट मैनेजर और आईटी सपोर्ट स्टाफ की भर्ती।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस योजना से प्रेरित होकर अन्य जिलों में भी समान प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं, जैसे प्रतापगढ़ में 9.59 करोड़ की लागत से बन रही डिजिटल लाइब्रेरी। कानपुर के छात्रों ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि यह उनके सपनों को पंख लगाएगी। एक स्थानीय छात्र ने बताया, "अब हमें शहर से बाहर किताबें मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिजिटल एक्सेस से हम ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
भविष्य की योजनाएं
सरकार का लक्ष्य 2027 तक कानपुर को 'स्मार्ट एजुकेशन सिटी' बनाना है। इसके तहत लाइब्रेरी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस किया जाएगा, जो छात्रों को पर्सनलाइज्ड रीडिंग सुझाव देगी। निर्माण कार्य की निगरानी के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया जाएगा, जहां नागरिक प्रगति की जानकारी ले सकेंगे। कानपुरवासी इस नई पहल से उत्साहित हैं। शिक्षा के इस डिजिटल सफर में गांधी भवन नया इतिहास रचेगा, जहां ज्ञान की रोशनी हर कोने तक पहुंचेगी।
कैसी होती है डिजिटल लाइब्रेरी?
डिजिटल लाइब्रेरी एक आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत पुस्तकालय है, जो पारंपरिक पुस्तकालयों से अलग, डिजिटल संसाधनों और इंटरनेट की शक्ति का उपयोग करके ज्ञान को सुलभ बनाती है। यह एक ऐसी वर्चुअल या भौतिक जगह हो सकती है, जहां किताबें, शोध पत्र, पत्रिकाएं, ऑडियो-वीडियो सामग्री और अन्य शैक्षिक संसाधन डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध होते हैं। नीचे डिजिटल लाइब्रेरी की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली संक्षेप में दी गई है
डिजिटल लाइब्रेरी कैसे काम करती है?
- भौतिक स्थान: कई डिजिटल लाइब्रेरी किसी भवन (जैसे कानपुर का गांधी भवन) में स्थापित की जाती हैं, जहां उपयोगकर्ता डिवाइस के साथ पढ़ाई कर सकते हैं।
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म: वेबसाइट या ऐप के जरिए सामग्री तक पहुंच संभव होती है। उदाहरण के लिए, उपयोगकर्ता लॉगिन करके किताबें पढ़ सकते हैं या डाउनलोड कर सकते हैं।
- सदस्यता मॉडल: कुछ लाइब्रेरी मुफ्त होती हैं, जबकि कुछ में सदस्यता शुल्क या लिमिटेड फ्री एक्सेस होता है।
- डेटा प्रबंधन: सामग्री को डिजिटल डेटाबेस में व्यवस्थित किया जाता है, जिसे क्लाउड स्टोरेज पर रखा जाता है ताकि डेटा सुरक्षित रहे।
कानपुर की डिजिटल लाइब्रेरी का उदाहरण
जैसा कि कानपुर में प्रस्तावित डिजिटल लाइब्रेरी में देखा जा सकता है:
- गांधी भवन में 50 हजार से अधिक डिजिटल किताबें होंगी।
- हाई-स्पीड इंटरनेट और स्मार्ट उपकरणों की सुविधा होगी।
- ग्रामीण क्षेत्रों में 222 छोटी डिजिटल लाइब्रेरी बनेंगी, जो पंचायत भवनों में स्थापित होंगी।
- सोलर पैनल्स और भूकंप प्रतिरोधी संरचना जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी।
लाभ
- सुलभता: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ती है।
- लागत प्रभावी: किताबें खरीदने की जरूरत कम होती है।
- समय की बचत: सामग्री तुरंत उपलब्ध होती है, लंबी खोज की जरूरत नहीं।
- वैश्विक कनेक्टिविटी: अंतरराष्ट्रीय स्तर की सामग्री तक पहुंच संभव।
- कौशल विकास: ऑनलाइन कोर्स और वीडियो के जरिए नई स्किल्स सीखी जा सकती हैं।



