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परेड मैदान पर सियासी संग्राम, दुकानदारों के साथ सड़क पर उतरी सपा-कांग्रेस, कही ये बात !

परेड मैदान पर सियासी संग्राम, दुकानदारों के साथ सड़क पर उतरी सपा-कांग्रेस, कही ये बात !

कानपुर के ऐतिहासिक परेड मैदान में शनिवार को बड़ा राजनीतिक जमावड़ा देखने को मिला। नगर निगम द्वारा दुकानों को हटाने के आदेश के खिलाफ सपा और कांग्रेस खुलकर मैदान में उतर आईं। दुकानदारों के साथ हुई बड़ी बैठक में सपा विधायक अमिताभ बाजपेई समेत कई नेता पहुंचे। कांग्रेस के नगर और ग्रामीण अध्यक्ष भी मंच पर मौजूद रहे। बैठक में सैकड़ों दुकानदार शामिल हुए और नगर निगम के फैसले का विरोध किया गया। पूरे इलाके में दिनभर राजनीतिक हलचल बनी रही और बाजार पूरी तरह बंद दिखाई दिया। दुकानदारों का कहना है कि यह सिर्फ दुकानें नहीं बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का सबसे बड़ा सहारा हैं।

48 घंटे का अल्टीमेटम बना विवाद

दरअसल शुक्रवार को नगर निगम की टीम परेड मैदान पहुंची थी। टीम ने माइक से एलान किया था कि दो दिन के भीतर दुकानदार अपनी दुकानें हटा लें वरना अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसी घोषणा के बाद व्यापारियों में भारी नाराजगी फैल गई। परेड मैदान में करीब एक हजार छोटी-बड़ी दुकानें लगती हैं जहां कपड़े, बैग और रोजमर्रा की जरूरत का सामान सस्ते दामों में मिलता है। शहर के गरीब और मध्यम वर्ग के लोग बड़ी संख्या में यहां खरीदारी करने आते हैं। दुकानदारों का कहना है कि यह बाजार सौ साल से भी ज्यादा पुराना है और अचानक इसे हटाना अन्याय है।

अमिताभ बाजपेई ने बोला हमला

आर्यनगर विधायक अमिताभ बाजपेई ने नगर निगम के आदेश को तुगलकी फरमान बताया। उन्होंने कहा कि जीप से पहुंचकर माइक पर दुकानों को हटाने की धमकी देना गरीबों के साथ अन्याय है। विधायक ने दावा किया कि यह जमीन नगर निगम की नहीं है बल्कि वक्फ या नजूल की जमीन है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पहले व्यापारियों से बात करनी चाहिए थी। अचानक कार्रवाई की चेतावनी से हजारों परिवारों में डर का माहौल बन गया है। बाजपेई ने साफ कहा कि सपा इस लड़ाई में दुकानदारों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

इतिहास और परंपरा का हवाला

नेताओं ने परेड मैदान को शहर की ऐतिहासिक पहचान बताया। उन्होंने कहा कि यहां परेड की सबसे पुरानी रामलीला होती है और यहीं से सौ साल पुराना जुलूस ए मोहम्मदी भी निकलता है। इसके अलावा यहां शादी समारोह और कई सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित होते रहे हैं। नेताओं का कहना है कि यह मैदान केवल व्यापार का केंद्र नहीं बल्कि कानपुर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। उनका आरोप है कि प्रशासन परंपराओं और गरीबों की आजीविका दोनों को खत्म करने की कोशिश कर रहा है।

कानूनी लड़ाई की तैयारी

बैठक के दौरान सपा और कांग्रेस नेताओं ने दुकानदारों को भरोसा दिलाया कि वह कानूनी और वैधानिक तरीके से इस लड़ाई को लड़ेंगे। नेताओं ने कहा कि आगे की रणनीति तैयार की जा रही है ताकि दुकानों को बचाया जा सके। उन्होंने व्यापारियों से एकजुट रहने की अपील भी की। बाजार बंद रहने से पूरे इलाके में सन्नाटा दिखाई दिया लेकिन दुकानदारों का गुस्सा साफ नजर आया। कई व्यापारियों ने कहा कि अगर प्रशासन पीछे नहीं हटा तो आंदोलन और बड़ा किया जाएगा।

लाठियों से नहीं डरेंगे दुकानदार

अमिताभ बाजपेई ने प्रशासन को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि नगर निगम की टीम जब चाहे आ जाए लेकिन दुकानदार पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि हम लोग मारपीट नहीं करेंगे लेकिन अन्याय भी नहीं सहेंगे। जरूरत पड़ी तो लाठियों के सामने अपनी छाती लेकर खड़े हो जाएंगे। इस बयान के बाद परेड मैदान का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। फिलहाल पूरे शहर की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन अपने फैसले पर कायम रहता है या बढ़ते विरोध के बीच कोई नया रास्ता निकालता है।

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