प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जापान यात्रा के दौरान भारत और जापान के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का ऐलान किया। 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने घोषणा की कि जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन (लगभग ₹6 लाख करोड़ या 68 अरब डॉलर) का निवेश करेगा। यह निवेश 2022 में पूर्व जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा द्वारा घोषित 5 ट्रिलियन येन (₹3.2 लाख करोड़) के पांच साल के लक्ष्य का दोगुना है, जो दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।
पीएम मोदी ने टोक्यो में इंडिया-जापान बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए अगले दशक के लिए एक व्यापक रोडमैप साझा किया। इस रोडमैप में जापान का ₹6 लाख करोड़ का निवेश बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर में किया जाएगा। दोनों देश स्टार्टअप्स और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करेंगे।
- सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा। हरित ऊर्जा और कार्बन तटस्थता परियोजनाओं में निवेश। AI, रोबोटिक्स, और डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग। चिकित्सा अनुसंधान और दवाओं के क्षेत्र में साझेदारी। हाई-स्पीड रेल और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों में निवेश। युवा शोधकर्ताओं और इंजीनियरों का आदान-प्रदान।भारत के राज्यों और जापान के प्रीफेक्चर्स के बीच सहयोग।
पीएम मोदी ने कहा, "जापान की तकनीकी ताकत और भारत की प्रतिभा का संयोजन इस सदी की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने भारत को निवेश के लिए सबसे बेहतर गंतव्य बताते हुए जापानी कंपनियों से 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर वर्ल्ड' पहल में शामिल होने का आह्वान किया।
प्रमुख परियोजनाएं और निवेश
जापान की शिंकान्सेन तकनीक पर आधारित इस परियोजना में जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) द्वारा ₹88,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। यह रेल 508 किमी की दूरी को 2 घंटे में पूरा करेगी।
- सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन अगले 5-6 वर्षों में भारत में ₹70,000 करोड़ का निवेश करेगी, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन और निर्यात बढ़ेगा। गुजरात का हंसलपुर संयंत्र वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनेगा। जापान की कंपनियां जैसे टोक्यो इलेक्ट्रॉन भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने में सहयोग करेंगी। दोनों देशों के बीच AI कोऑपरेशन इनिशिएटिव के तहत युवा शोधकर्ताओं का आदान-प्रदान होगा। सोजिट्ज़ कॉर्पोरेशन और इंडियन ऑयल 395 मिलियन डॉलर की लागत से 30 बायोगैस प्लांट स्थापित करेंगे।
पीएम मोदी ने कहा कि यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। दोनों देश क्वाड (भारत, जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा दे रहे हैं, विशेष रूप से चीन की बढ़ती आक्रामकता के जवाब में।
जापानी कंपनियों की बढ़ती रुचि
जापानी कंपनियां जैसे टोयोटा, डाइकिन, और फुजित्सु भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं। टोयोटा ने कर्नाटक और महाराष्ट्र में ₹23,000 करोड़ का निवेश किया है, जबकि फुजित्सु 9,000 भारतीय इंजीनियरों की भर्ती करेगी। डाइकिन ने ₹1,400 करोड़ के निवेश के साथ भारत को अपना वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की योजना बनाई है।
यह निवेश ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ने भारत और अन्य देशों पर 50% तक टैरिफ लगाए हैं, जिससे जापानी कंपनियां भारत को वैकल्पिक निवेश गंतव्य के रूप में देख रही हैं। पीएम मोदी ने जापानी निवेशकों को भरोसा दिलाया कि भारत की स्थिरता, पारदर्शी नीतियां, और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था इसे निवेश के लिए आदर्श बनाती है।



