पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध को 39 दिन बीत चुके हैं और इसका असर अब कई देशों में साफ दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप होने से तेल और गैस सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। भारत को सीमित संख्या में जहाजों की अनुमति मिल रही है, लेकिन पड़ोसी देशों में हालात काफी खराब हो चुके हैं। इस संकट ने पूरे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है और कई देशों को सख्त कदम उठाने पड़े हैं।
बांग्लादेश और श्रीलंका में सख्ती
बांग्लादेश में ऊर्जा संकट के कारण शॉपिंग मॉल शाम 7 बजे तक बंद किए जा रहे हैं और दफ्तरों का समय भी घटाकर 7 घंटे कर दिया गया है। बिजली बचाने के लिए रोशनी कम करने और गैर जरूरी यात्रा पर रोक जैसे फैसले लागू किए गए हैं। वहीं श्रीलंका में तेल सप्लाई बनाए रखने के लिए सार्वजनिक छुट्टी तक घोषित करनी पड़ी। बस और ट्रेन सेवाएं सीमित कर दी गई हैं और बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि श्रीलंका को भारत से तेल सहायता लेनी पड़ी है।
नेपाल और पाकिस्तान में भी असर
नेपाल में सरकारी अधिकारियों के तेल कोटे में 50 प्रतिशत कटौती कर दी गई है और स्कूलों तथा सरकारी दफ्तरों में अतिरिक्त छुट्टियां लागू कर दी गई हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं और गैस का कोटा तय किया गया है। वहीं पाकिस्तान में बाजार रात 8 बजे तक बंद करने का आदेश दिया गया है और सरकारी विभागों में तेल उपयोग आधा कर दिया गया है। शादी समारोहों पर भी समय सीमा लागू कर दी गई है और दफ्तरों में स्टाफ कम करने के निर्देश दिए गए हैं।
मालदीव और अन्य देशों की स्थिति
मालदीव भी इस संकट से अछूता नहीं है और उसे भारत से तेल और गैस की मदद लेनी पड़ रही है। सप्लाई बनाए रखने के लिए कीमतें बढ़ाई गई हैं। इन हालातों से साफ है कि ऊर्जा संकट ने छोटे देशों की अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन दोनों को प्रभावित किया है।
भारत में स्थिति नियंत्रण में
भारत में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई है और कीमतों को स्थिर रखा गया है। एलपीजी की सप्लाई बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने और आयात बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं। घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए गैस सप्लाई को डायवर्ट किया गया है। साथ ही होर्मुज मार्ग से आपूर्ति जारी रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी किए जा रहे हैं।
