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ईरान-अमेरिका टकराव के बीच क्यों बढ़ी एलपीजी की चिंता, जानिए भारत में गैस की कहानी और सप्लाई का सच

ईरान-अमेरिका टकराव के बीच क्यों बढ़ी एलपीजी की चिंता, जानिए भारत में गैस की कहानी और सप्लाई का सच

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक महसूस होने लगा है। कई जगह गैस सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और लोग खाली सिलेंडर लेकर इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें लोग गैस के लिए परेशान नजर आ रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि भारत में एलपीजी की व्यवस्था कैसे काम करती है।

भारत में गैस की शुरुआत कैसे हुई
भारत में रसोई गैस का इतिहास करीब सात दशक पुराना है। साल 1956 में तेल और गैस की खोज को मजबूत करने के लिए सरकारी ऊर्जा संस्था की स्थापना की गई। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में तेल और गैस के भंडार मिलने लगे। मुंबई तट के पास बॉम्बे हाई, असम और कृष्णा-गोदावरी क्षेत्र जैसे इलाकों से कच्चे तेल और गैस का उत्पादन शुरू हुआ। यहीं से एलपीजी बनने और लोगों तक पहुंचने की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ी।

एलपीजी बनती कैसे है
एलपीजी सीधे जमीन से उसी रूप में नहीं निकलती, बल्कि इसे खास प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। यह मुख्य रूप से दो गैसों के मिश्रण से बनती है, जिन्हें प्रोपेन और ब्यूटेन कहा जाता है। इन गैसों को दो तरीके से तैयार किया जाता है। पहला तरीका कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान और दूसरा प्राकृतिक गैस की प्रोसेसिंग के समय। इसी प्रक्रिया के बाद एलपीजी सिलेंडर में भरकर घरों तक पहुंचाई जाती है।

देश में कहां-कहां मिलता है तेल और गैस
भारत में कई राज्यों में तेल और गैस के भंडार मौजूद हैं। असम, गुजरात, राजस्थान, मुंबई तट और कृष्णा-गोदावरी क्षेत्र प्रमुख उत्पादन क्षेत्र माने जाते हैं। असम का डिगबोई इलाका देश का सबसे पुराना तेल क्षेत्र माना जाता है। वहीं नाहरकटिया और गुजरात का अंकलेश्वर भी बड़े ऊर्जा स्रोत रहे हैं। इन क्षेत्रों से मिलने वाले कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान एलपीजी का उत्पादन भी किया जाता है।

एलपीजी ने रसोई की तस्वीर बदल दी
एक समय था जब देश के अधिकतर घरों में खाना लकड़ी, कोयला या मिट्टी के तेल से बनता था। चूल्हे से निकलने वाला धुआं महिलाओं और बच्चों की सेहत के लिए नुकसानदायक होता था। एलपीजी के आने के बाद रसोई की तस्वीर बदल गई। इससे खाना जल्दी बनने लगा, धुआं कम हुआ और घर की रसोई साफ रहने लगी। बाद में सरकारी योजनाओं के जरिए गांवों तक भी गैस कनेक्शन पहुंचाए गए, जिससे लाखों परिवारों को राहत मिली।

भारत कितना गैस आयात करता है
भारत अपनी जरूरत की गैस का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से भी मंगाता है। आंकड़ों के अनुसार करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात की जाती है जबकि लगभग 40 प्रतिशत गैस देश में ही तैयार होती है। आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जिनमें सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात प्रमुख हैं। इसके अलावा अमेरिका, अल्जीरिया और नाइजीरिया जैसे देशों से भी गैस भारत पहुंचती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का असर कभी-कभी गैस सप्लाई और कीमतों पर भी दिखाई देता है।

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