ईरान और अमेरिका इजराइल के बीच चल रही जंग के बीच एक बड़ा मोड़ सामने आया है। कतर पर हुए हमले के बाद अब अमेरिका ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध को हटाने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो ईरान को बड़ी आर्थिक राहत मिल सकती है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब पूरे पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस कदम से न केवल ईरान को फायदा होगा बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है।
समुद्र में फंसा तेल बिकने की तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान का करीब 140 मिलियन बैरल तेल समुद्र में फंसा हुआ है। अमेरिका अब इसी तेल को बेचने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। अगर यह फैसला लागू होता है तो यह तेल तुरंत बाजार में आ सकता है। इससे ईरान को अपने हिसाब से कीमत तय करने की आजादी भी मिलेगी। फिलहाल यह तेल लंबे समय से अटका हुआ है और इसे बेच पाने में ईरान को मुश्किल हो रही थी। अब इस फैसले से उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है।
तेल की कीमतों में लगातार उछाल
दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। वहीं कुछ देशों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो यह कीमत 180 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती है। इससे साफ है कि जंग का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ रहा है। महंगे तेल का असर आम लोगों की जेब पर भी देखने को मिल सकता है।
ईरान को मिल सकता है बड़ा फायदा
अगर प्रतिबंध हटता है तो ईरान को बड़ी कमाई होने की उम्मीद है। अनुमान है कि वह इस तेल को बेचकर करीब 15 अरब डॉलर तक कमा सकता है। अब तक ईरान सीमित बाजार में ही तेल बेच पा रहा था, लेकिन प्रतिबंध हटने से उसके लिए नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युद्ध के बीच उसे राहत मिल सकती है।
होर्मुज मार्ग बना नई रणनीति का हिस्सा
ईरान ने होर्मुज के पास एक सुरक्षित रास्ता तैयार किया है, जिससे जहाजों को गुजरने दिया जा रहा है। हालांकि इसके बदले शुल्क भी लिया जा रहा है। अभी भी बड़ी संख्या में जहाज इस मार्ग पर फंसे हुए हैं। यह इलाका वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है और यही वजह है कि इस क्षेत्र पर सभी की नजर बनी हुई है।
लंबी जंग की रणनीति दिखा रही असर
ईरान ने शुरुआत से ही इस जंग को लंबा खींचने की रणनीति अपनाई थी। उसने खाड़ी क्षेत्र में अपने विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए कई कदम उठाए। होर्मुज को बाधित करना भी उसी रणनीति का हिस्सा था। अब जब तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और वैश्विक दबाव बन रहा है, तो ईरान की यह योजना असर दिखाती नजर आ रही है। आगे क्या होगा, यह पूरी तरह हालात पर निर्भर करेगा।
