logo

header-ad
header-ad
भारतीय वायुसेना को मिलेंगे नए तेजस जेट, जानें खासियत

भारतीय वायुसेना को मिलेंगे नए तेजस जेट, जानें खासियत

भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करने के लिए दो अत्याधुनिक स्वदेशी Mk1A और तेजस Mk2 शामिल करने जा रही है।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित तेजस जेट, भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायुसेना को तेजस Mk1A और तेजस Mk2 जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों की डिलीवरी जल्द शुरू होने वाली है। तेजस Mk1A, 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल फाइटर जेट, भारतीय वायुसेना के पुराने मिग-21 विमानों का स्थान लेगा। यह जेट आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2021 में 83 तेजस एमके-1ए जेट्स के लिए HAL के साथ 48 हजार करोड़ रुपये का करार किया था। इसके अलावा, नवंबर 2023 में 97 नए तेजस एमके-1ए जेट्स के लिए 67 हजार करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया गया। पहला तेजस एमके-1ए फरवरी 2024 में वायुसेना को सौंपा गया, और बाकी विमानों की डिलीवरी 2029 तक पूरी होने की उम्मीद है।

HAL अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर प्रतिवर्ष 24 विमान बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे डिलीवरी की गति तेज होगी। बेंगलुरु और नासिक में इन जेट्स का निर्माण हो रहा है, और अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) द्वारा F404 इंजनों की आपूर्ति ने उत्पादन को गति दी है।

तेजस Mk2 लड़ाकू विमान

तेजस Mk2 एक और उन्नत संस्करण है, जो 4.5 पीढ़ी का फाइटर जेट है और पुराने मिग-29, मिराज 2000, और जगुआर विमानों को पूरी तरह से बदलने के लिए तैयार किया जा रहा है। यह जेट 90% स्वदेशी सामग्री से बना होगा और इसमें F414-INS6 इंजन, AESA रडार, और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां शामिल होंगी।

तेजस Mk2 का पहला प्रोटोटाइप अक्टूबर-नवंबर 2025 में तैयार होगा, और पहली उड़ान फरवरी-मार्च 2026 में होने की उम्मीद है। इसका उत्पादन 2028-29 में शुरू होगा, और 2032 से वायुसेना को डिलीवरी शुरू हो जाएगी। शुरुआत में 120 जेट्स का ऑर्डर दिया गया है, जो 2035 तक 180 और 2040 तक 200 यूनिट तक बढ़ सकता है।

तेजस Mk2 में नाइट विजन कॉकपिट, HOTAS (हैंड्स ऑन थ्रॉटल-एंड-स्टिक) सिस्टम, और 30mm GSh-30-1 गन होगी, जो प्रति मिनट 1500-1800 गोलियां दाग सकती है। यह 2223 किमी/घंटा की रफ्तार और 2500 किमी की रेंज के साथ 56,758 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।

तेजस का महत्व और आत्मनिर्भर भारत

तेजस जेट्स भारतीय वायुसेना की लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वर्तमान में वायुसेना के पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि दो मोर्चों (पाकिस्तान और चीन) पर युद्ध के लिए 42 स्क्वाड्रनों की जरूरत है। तेजस Mk1A और Mk2 की डिलीवरी से यह कमी धीरे-धीरे पूरी होगी।

तेजस प्रोग्राम भारत के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रतीक है। इसके निर्माण में HAL, वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA), और DRDO की महत्वपूर्ण भूमिका है। तेजस की मांग मलेशिया, अर्जेंटीना, मिस्र, और फिलीपींस जैसे देशों से भी है, जिससे भारत की रक्षा निर्यात क्षमता बढ़ रही है।

Leave Your Comment