पंजाब के फिरोजपुर जिले में स्थित हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन देश के सबसे अनोखे रेलवे स्टेशनों में गिना जाता है। यह स्टेशन भारत-पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित है और रेलवे लाइन का अंतिम पड़ाव माना जाता है। यहां पहुंचने के बाद ट्रेन आगे नहीं जा सकती क्योंकि इसके आगे कोई रेल ट्रैक मौजूद नहीं है। यही वजह है कि यह स्टेशन बाकी रेलवे स्टेशनों से बिल्कुल अलग पहचान रखता है।
साल में सिर्फ दो दिन चलती है ट्रेन
हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पूरे साल नियमित ट्रेन सेवा नहीं चलती। इस स्टेशन पर केवल दो विशेष मौकों पर ही ट्रेन का संचालन किया जाता है। यही कारण है कि इसे देश का सबसे रहस्यमयी और अनोखा रेलवे स्टेशन भी कहा जाता है। आम दिनों में यहां रेल यातायात पूरी तरह बंद रहता है।
23 मार्च का विशेष महत्व
हर साल 23 मार्च को शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत को याद करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर फिरोजपुर कैंट से हुसैनीवाला तक विशेष ट्रेन चलाई जाती है। बड़ी संख्या में लोग शहीद स्मारक पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस दिन स्टेशन पर लंबे समय बाद रेल की आवाज सुनाई देती है।
वैसाखी पर भी चलती है ट्रेन
दूसरा अवसर 13 अप्रैल यानी वैसाखी का होता है। इस दिन भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेन सेवा शुरू की जाती है। वैसाखी के दौरान बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक स्थल का दौरा करते हैं। इसलिए रेलवे इस दिन भी विशेष व्यवस्था करता है।
इतिहास से जुड़ा है स्टेशन
हुसैनीवाला सिर्फ एक रेलवे स्टेशन नहीं बल्कि देश के इतिहास और शहीदों की यादों से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। यहां स्थित शहीद स्मारक देशभक्ति का बड़ा प्रतीक माना जाता है। भारत-पाकिस्तान विभाजन से पहले यह रेल मार्ग आगे तक जुड़ा हुआ था, लेकिन सीमा बनने के बाद यह रेलवे लाइन यहीं समाप्त हो गई।
देशभक्ति का प्रतीक बना स्टेशन
आज हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन अपनी अनोखी व्यवस्था और ऐतिहासिक महत्व के कारण लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। साल में सिर्फ दो दिन ट्रेन चलने के बावजूद यह स्टेशन भारतीय रेलवे के सबसे चर्चित और खास स्टेशनों में शामिल है। यहां आने वाले लोग सिर्फ रेलवे स्टेशन नहीं बल्कि देश के गौरवशाली इतिहास की एक झलक भी देखते हैं।
