स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद में एक बिल लाने की तैयारी है, जिसके तहत इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूला जा सकता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है और युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं।
पहले से वसूली के संकेत, अब कानूनी रूप देने की कोशिश
बताया जा रहा है कि ईरान ने कुछ जहाजों से अनौपचारिक रूप से फीस मांगनी भी शुरू कर दी है। कुछ मामलों में एक जहाज से करीब 20 लाख डॉलर तक की मांग की गई। अब इसे कानून का रूप देकर नियमित वसूली की तैयारी हो रही है। ईरान का दावा है कि यह ‘सुरक्षित मार्ग’ देने के बदले लिया जाएगा, जिससे उसकी पकड़ और मजबूत होगी।
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। ऐसे में अगर यहां टोल लागू होता है, तो शिपिंग कंपनियों का खर्च बढ़ेगा। इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक की कीमतों पर पड़ेगा। पहले ही तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, और यह कदम महंगाई को और बढ़ा सकता है।
भारत पर क्या होगा असर
भारत अपनी तेल और एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से पूरा करता है। ऐसे में अगर टोल लागू होता है तो भारत के लिए आयात महंगा हो सकता है। इससे आम लोगों पर भी असर पड़ेगा क्योंकि ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि, भारत सरकार इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
सरकार ने दावे को बताया बेबुनियाद
भारत के शिपिंग मंत्रालय ने इन खबरों को खारिज करते हुए साफ कहा है कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जहां किसी भी तरह का टोल लगाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। सरकार का कहना है कि यहां सभी देशों को स्वतंत्र आवाजाही का अधिकार है, इसलिए इस तरह के दावे फिलहाल आधारहीन हैं।
बढ़ सकता है वैश्विक तनाव
ईरान का यह कदम सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी माना जा रहा है। इससे वह अपनी ताकत दिखाना चाहता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह विवाद को और बढ़ा सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति और तेल बाजार दोनों पर बड़ा असर डाल सकता है।
